प्रियंका/रायपुर: छत्तीसगढ़ से खाड़ी देशों, विशेषकर दुबई, को होने वाला तरबूज निर्यात इस बार युद्ध और समुद्री मार्ग बाधित होने के कारण पूरी तरह ठप हो गया है. इसके चलते स्थानीय मंडियों में तरबूज की भारी भरमार हो गई है और कीमतें गिरकर बहुत कम हो गई हैं. किसानों को लगभग 300 करोड़ रुपये तक के नुकसान की आशंका है. पहले जहां तरबूज 20–25 रुपये प्रति किलो बिकता था, अब वह 7–8 रुपये प्रति किलो तक गिर गया है. इस स्थिति से किसान और व्यापारी दोनों प्रभावित हुए हैं.
समुद्री मार्ग बंद, निर्यात पूरी तरह रुका
गर्मी के मौसम में छत्तीसगढ़ के तरबूजों की खाड़ी देशों में भारी मांग रहती थी. इन्हें मुंबई बंदरगाह के जरिए विदेश भेजा जाता था, लेकिन इस बार समुद्री मार्ग बाधित होने के कारण निर्यात पूरी तरह रुक गया है. पहले जो व्यापारी उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों से तरबूज खरीदकर विदेश भेजते थे, वे इस बार नहीं पहुंच रहे हैं.
मंडियों में तरबूज की भरमार और कीमतों में गिरावट
निर्यात रुकने के कारण स्थानीय मंडियों में तरबूज की भारी भरमार हो गई है. थोक कीमतें 20–25 रुपये प्रति किलो से गिरकर 7–8 रुपये प्रति किलो रह गई हैं. इससे किसानों और व्यापारियों दोनों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है.
व्यापारियों की चिंता बढ़ी
रायपुर के फल व्यापारी विष्णु प्रसाद साहू और तरबूज व्यापारी राजा निर्मलकर के अनुसार, इस स्थिति में लगभग 300 करोड़ रुपये तक के नुकसान का अनुमान है. खुदरा बाजार में भी कीमतें 40–50 रुपये से घटकर 15–20 रुपये प्रति किलो तक आ गई हैं.
छत्तीसगढ़ की तरबूज खेती और निर्यात पर असर
छत्तीसगढ़ में रायपुर, गरियाबंद, महासमुंद और बलौदाबाजार जैसे क्षेत्रों में लगभग 10,000–12,000 एकड़ में तरबूज की खेती होती है. फरवरी से अप्रैल के बीच यहां उच्च गुणवत्ता वाले और मीठे तरबूज तैयार होते हैं, जिनकी मांग दुबई तक रहती है. लेकिन इस बार निर्यात रुकने से पूरी आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो गई है और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है.
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-भारत एक्सप्रेस
Written By: Shubhra Rai (Intern)
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