PMO Shift to Seva Teerth: पिछले पांच दशकों से भारत के सबसे महत्वपूर्ण फैसलों का गवाह रहा साउथ ब्लॉक अब खाली होने जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को साउथ ब्लॉक में आखिरी कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता करेंगे. इसके बाद पीएमओ, कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का कार्यालय नवनिर्मित ‘सेवा तीर्थ’ में शिफ्ट हो जाएगा. यह बदलाव सिर्फ जगह का नहीं, बल्कि शासन की सोच और प्रतीकवाद का भी है.
साउथ ब्लॉक में आखिरी कैबिनेट बैठक
शुक्रवार दोपहर साउथ ब्लॉक में होने वाली कैबिनेट बैठक प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में होगी. बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री और अधिकारी सेवा तीर्थ जाएंगे. वहां नया पीएमओ, कैबिनेट सचिवालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और NSA अजीत डोभाल का कार्यालय एक ही परिसर में होगा. इंडिया हाउस भी यहीं बनेगा, जो उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडलों की मेजबानी का नया केंद्र बनेगा.
नेहरू की पहली कैबिनेट बैठक से शुरू हुआ दौर
साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक का निर्माण 1931 में हुआ था. प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में पहली कैबिनेट बैठक यहीं हुई थी. 1947 में छोटे से प्रधानमंत्री सचिवालय (PMS) से शुरू हुआ पीएमओ 1964 में लाल बहादुर शास्त्री के समय वैधानिक दर्जा पाया. इंदिरा गांधी के कार्यकाल में इसका दायरा बढ़ा और 1977 में मोरारजी देसाई ने इसका नाम पीएमओ रखा. अब यह दौर खत्म हो रहा है.
सेवा तीर्थ: शासन का नया केंद्र
सेवा तीर्थ को पहले कार्यपालिका परिसर कहा जाता था. नाम बदलकर ‘सेवा तीर्थ’ करने में वैचारिक संदेश है—सत्ता से सेवा की ओर बदलाव. यह परिसर तीन हिस्सों में बंटा है:
- सेवा तीर्थ एक: प्रधानमंत्री कार्यालय
- सेवा तीर्थ दो: कैबिनेट सचिवालय
- सेवा तीर्थ तीन: राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और NSA कार्यालय
इससे संवेदनशील मामलों पर तालमेल बढ़ेगा. पुरानी व्यवस्था में ये संस्थाएं अलग-अलग जगहों पर थीं. लगभग 1,200 करोड़ रुपये की लागत से बना सेवा तीर्थ शासन को और कुशल बनाने का प्रतीक है.
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-भारत एक्सप्रेस
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