राहुल गांधी और प्रियंका गांधी.
बिहार की सियासत एक बार फिर नए मोड़ पर है. 27 अगस्त को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा बिहार के सीतामढ़ी स्थित पवित्र माता जानकी मंदिर में महागठबंधन के अन्य नेताओं के साथ पूजा-अर्चना करेंगे, यह आगामी चुनावों के मद्देनज़र महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
जानकी मंदिर का महत्व
सीतामढ़ी का जानकी मंदिर धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है. यह स्थान माता सीता की जन्मस्थली मानी जाती है और रामायण काल से ही इसकी महत्ता रही है.
कांग्रेस की वोटर अधिकार यात्रा 17 अगस्त को सासाराम से शुरू हुई थी और इसका समापन 1 सितंबर को पटना में प्रस्तावित है. इस यात्रा का उद्देश्य मतदाताओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और बीजेपी के खिलाफ जन समर्थन जुटाना है. इस अभियान के तहत दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदायों को साधने की रणनीति देखी जा रही है.
राहुल-प्रियंका की रणनीति: धर्म और राजनीति का मेल?
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का जानकी मंदिर जाना धार्मिक आस्था के साथ साथ राजनीतिक रणनीति भी है. पिछले कुछ वर्षों में देखा गया है कि भाजपा ने “हिंदुत्व” और “संस्कृति” के एजेंडे पर मजबूत पकड़ बनाई है. ऐसे में कांग्रेस भी अब साफ तौर पर “सॉफ्ट हिंदुत्व” की राह पर चलती नजर आ रही है, ताकि आम मतदाता के धार्मिक विश्वासों से खुद को जोड़ा जा सके. क्योंकि राम मंदिर के उद्घाटन में कांग्रेस पार्टी की ओर से इस समारोह में जाने का बहिष्कार किया गया था और इसी को लेकर बीजेपी ,पार्टी पर हमलावर रही थी .
राहुल और प्रियंका गांधी का जानकी मंदिर में पूजा-अर्चना करना एक सामान्य धार्मिक कदम नहीं बल्कि बड़ा राजनीतिक संदेश भी होगा . इससे यह स्पष्ट संदेश होगा कि कांग्रेस और महागठबंधन धार्मिक भावनाओं को सम्मान देते हुए सामाजिक न्याय ,दोनों पर एक साथ काम करना चाह रहे हैं. आने वाले चुनावों में इस कदम का क्या असर होगा, यह तो समय बताएगा, लेकिन इतना तय है कि बिहार की सियासी जमीन पर हलचल तेज़ हो चुकी है.
ये भी पढ़ें: बिहार में प्रियंका! आज राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ में शामिल होंगी प्रियंका गांधी
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

