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अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स वर्ल्‍ड पीस सेंटर में शांति शिक्षा प्राप्त करने आएंगे भारत, आचार्य लोकेश मुनि बोले- ये अनुबंध मील का पत्थर

गुरुग्राम में जैन आचार्य लोकेश मुनि के नेतृत्व में “विश्व शांति और सद्भावना” को बढ़ावा देने वाला अंतरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया. ऐसे प्रयासों से युवा पीढ़ी को अहिंसा, सहिष्णुता और सद्भावना के मूल्यों से परिचित कराया जाएगा.

Vijay Ram Edited by Vijay Ram

World Peace Center Gurugram: विश्व शांति और सद्भावना को बढ़ावा देने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, अमेरिका की प्रतिष्ठित स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और भारत के विश्व शांति केंद्र (World Peace Center) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है. अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अनुराग ने कहा कि स्टैनफोर्ड के छात्र विश्व शांति केंद्र में शांति शिक्षा के लिए भारत आएंगे.

यह घोषणा आज विश्व शांति केंद्र-गुरुग्राम (Gurugram) में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेमिनार “विश्व शांति और सद्भावना शांति शिक्षा के माध्यम से” में की गई. सेमिनार में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अनुराग ने मुख्य वक्ता के रूप में भाग लिया और घोषणा की कि स्टैनफोर्ड के विद्यार्थी शांति शिक्षा प्राप्त करने के लिए भारत के विश्व शांति केंद्र आएंगे.

शांति शिक्षा युवाओं को सशक्त बनाने का माध्‍यम

प्रोफेसर अनुराग ने अपने संबोधन में कहा कि आज की दुनिया में संघर्ष और अशांति बढ़ रही है, ऐसे में शांति शिक्षा युवाओं को सशक्त बनाने का एक प्रभावी माध्यम है. उन्होंने जोर देकर कहा कि स्टैनफोर्ड के छात्र भारत की प्राचीन शांति परंपराओं से सीखेंगे और वैश्विक स्तर पर शांति के संदेश को फैलाएंगे. इस समझौते से दोनों संस्थानों के बीच ज्ञान आदान-प्रदान, संयुक्त कार्यक्रम और अनुसंधान की संभावनाएं खुलेंगी.

‘शांति और सद्भावना का पूरी दुनिया में होगा प्रसार’

जैन आचार्य लोकेश मुनि (Acharya Lokesh Muni), जो विश्व शांति केंद्र के संस्थापक हैं, ने इस समझौते को विश्व शांति के लिए एक मील का पत्थर बताया. उन्होंने कहा, “स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और विश्व शांति केंद्र का यह अनुबंध न केवल शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति लाएगा, बल्कि पूरी दुनिया में शांति और सद्भावना का प्रसार करेगा. भारत की आध्यात्मिक विरासत अब वैश्विक मंच पर चमकेगी.” आचार्य लोकेश मुनि को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय सांप्रदायिक सद्भाव पुरस्कार, अमेरिकी राष्ट्रपति पुरस्कार और संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका, ब्रिटेन तथा कनाडा की संसदों द्वारा सम्मानित किया जा चुका है.

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वैश्विक शिक्षा और शांति प्रयासों में भारत की भूमिका

गुरुग्राम में आयोजित सेमिनार में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया. इस कार्यक्रम की वीडियो में मंच पर बैठे वक्ताओं को देखा जा सकता है, जहां बैकग्राउंड में “विश्व शांति और सद्भावना शांति शिक्षा के माध्यम से” का बैनर साफ दिखाई देता है. यह वीडियो ट्वीट के माध्यम से आचार्य लोकेश मुनि के आधिकारिक एक्स हैंडल से साझा किया गया. यह समझौता वैश्विक शिक्षा और शांति प्रयासों में भारत की भूमिका को मजबूत करेगा.

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