पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. युद्ध विराम की कोशिशों के बावजूद दोनों देशों के बीच संघर्ष तेज हो गया है. इस दुश्मनी की सबसे बड़ी कीमत वहां काम कर रहे बेकसूर लोगों को चुकानी पड़ रही है. इस पूरे विवाद में अब तक कई भारतीय नागरिकों की जान जा चुकी है. ईरान ने जहां अमेरिका के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, वहीं अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों पर हमले किए. इन हमलों ने भारत की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इन जहाजों पर भारतीय नाविक सवार थे.
आइए आसान भाषा में समझते हैं कि कब, कहां और कैसे भारतीय नागरिक इस जंग का शिकार बने..
जंग की शुरुआत और भारतीयों पर पहला हमला
पश्चिम एशिया में इस संकट की शुरुआत 28 फरवरी, 2026 को हुई थी. इसके तुरंत बाद, 1 मार्च 2026 को ओमान के मस्कट तट से दूर ‘एमकेडी व्योम’ नाम के एक तेल टैंकर पर आत्मघाती नाव से हमला किया गया. यह जहाज नीदरलैंड से सऊदी अरब जा रहा था. इस जहाज पर 16 भारतीय सवार थे, जिनमें से मुंबई के रहने वाले एक 33 वर्षीय नाविक की मौत हो गई. बाकी नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया.
ओमान के पास दूसरी बड़ी घटना
1 मार्च 2026 को ही ओमान के मुसन्दम प्रायद्वीप के पास ‘एमटी स्काईलाइट’ नाम के जहाज को निशाना बनाया गया. इस तेल टैंकर पर अमेरिकी प्रतिबंध थे क्योंकि यह ईरान का तेल ले जा रहा था. इस हमले में जहाज के कप्तान आशीष कुमार और एक अन्य क्रू मेंबर दिलीप सिंह की मौत हो गई. इसके अलावा चार अन्य भारतीय नाविक गंभीर रूप से घायल हो गए.
इराक और ओमान में आम नागरिकों की मौत
इसके बाद 11 मार्च 2026 को इराक के बसरा के पास फारस की खाड़ी में अमेरिकी मालिकाना हक वाले जहाज ‘एमटी सेफसी विष्णु’ पर हमला हुआ. इस घटना में मुंबई के रहने वाले एडिशनल चीफ इंजीनियर देवनंदन प्रसाद सिंह की जान चली गई.
वहीं, 13 मार्च 2026 को ओमान के सोहार शहर में एक ईरानी ड्रोन हमला हुआ. यह हमला किसी जहाज पर नहीं बल्कि जमीन पर हुआ था. इस धमाके में वहां काम कर रहे दो भारतीय मजदूरों की मौत हो गई और 10 अन्य भारतीय घायल हो गए. ओमान की धरती पर आम नागरिकों के मारे जाने की यह पहली घटना थी.
सऊदी अरब और यूएई भी नहीं रहे सुरक्षित
ईरान और अमेरिका की यह जंग धीरे-धीरे दूसरे खाड़ी देशों में भी फैल गई. 18 मार्च 2026 को सऊदी अरब की राजधानी रियाद पर ईरान ने मिसाइल और ड्रोन से बड़ा हमला किया. इस हमले की चपेट में आने से एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई. इसके कुछ दिनों बाद, 26 मार्च 2026 को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अबू धाबी पर भी ईरान ने मिसाइल दागी. इस घटना में भी एक भारतीय नागरिक ने अपनी जान गंवाई.
जून में अमेरिकी हमलों से बढ़ा तनाव
हाल ही में जून महीने में अमेरिका की तरफ से होर्मुज जलडमरूमध्य में चार दिनों के भीतर तीन बड़े तेल टैंकरों को निशाना बनाया गया. 10 जून 2026 को ‘एमटी सेट्टेबेलो’ पर हुए अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई. इसके बाद 11 जून को भी अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ‘एमटी जालवीर’ नाम के जहाज पर मिसाइलें दागीं, हालांकि इस घटना में सभी 20 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया.
भारत सरकार का कड़ा रुख
इन घटनाओं को लेकर भारत सरकार बेहद गंभीर है. भारतीय विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी हमलों में भारतीय नाविकों की मौत पर कड़ा विरोध जताया है. भारत ने नई दिल्ली में अमेरिकी राजनयिकों को तलब कर अपनी नाराजगी दर्ज कराई है. अब तक इस पूरे संघर्ष में करीब 9 अलग-अलग घटनाओं में 13 भारतीयों की मौत हो चुकी है, जिसने पश्चिम एशिया में रहने वाले लाखों भारतीयों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है.
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