22 साल पहले आस्ट्रेलिया में हुई हत्या के मामले में गिरफ्तार मोहम्मद बशीरुद्दीन को दिल्ली की एक अदालत ने सबूत के अभाव में बरी कर दिया है. अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रणव जोशी ने कहा कि यह गलत पहचान का मामला है, क्योंकि आरोपी की उंगलियों के निशान (फिंगरप्रिंट) 2003 के भगोड़े आरोपी के फिंगरप्रिंट से मेल नहीं खाते. इसके साथ ही कोर्ट ने फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर 37 वर्षीय मोहम्मद बशीरुद्दीन को बरी कर दिया.
विदेशी रिकॉर्ड में असली आरोपी का नाम बशीरउद्दीन मोहम्मद
आरोपी के वकील ने अदालत को बताया कि विदेशी रिकॉर्ड में असली आरोपी का नाम बशीरउद्दीन मोहम्मद है. वकील ने कहा कि वह एक अलग आदमी हैं. वकील ने यह भी कहा कि मोहम्मद बशीरुद्दीन ने अपना पासपोर्ट 2016 में बनवाया था. यह घटना 29 जून 2003 की है, जब रेडफर्न, सिडनी के जेम्स स्टीट पर एक व्हीली बिन में स्लीपिंग बैग के अंदर शव मिला था. मृतक की पहचान शौकत मोहम्मद के रूप में हुई.
नशीला पदार्थ देकर की हत्या
जांच मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, नशीला पदार्थ देकर, पीट-पीटकर और फिर गला घोंटकर हत्या की गई थी. हालांकि हत्या के बाद से आरोपी फरार था. लेकिन इसी बीच बशीरुद्दीन नामक एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया और इसे असली हत्यारा बताया गया. मामले की सुनवाई के दौरान उसके वकील ने कहा कि इसपर हत्या का झूठा आरोप लगाया गया है. इसने हत्या नहीं की है और ना ही इस हत्या में यह शामिल रहा है.
न्यू साउथ वेल्स सरकार ने आस्ट्रेलियाई डॉलर के इनाम की घोषणा की
हालांकि इसके बरी होने के बाद न्यू साउथ वेल्स के अधिकारियों ने कहा है कि मामला अभी भी खुला है. न्यू साउथ वेल्स सरकार ने हत्या के लिए जिम्मेदार भगोड़े अपराधी की गिरफ्तारी की सूचना देने वाले को 100000 आस्ट्रेलियाई डॉलर के इनाम की घोषणा की है.
-भारत एक्सप्रेस
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