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मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी अल फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जावेद अहमद सिद्धकी को साकेत कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अल फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जावेद अहमद सिद्दीकी को साकेत कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.

Al Falah University Money Laundering Case

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी अल फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जावेद अहमद सिद्धकी को साकेत कोर्ट ने 14 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. एडिशनल सेशन जज शीतल चौधरी प्रधान की कोर्ट ने 17 अप्रैल तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेजा है. 24 मार्च को ईडी ने एक अन्य मामले में सिद्धकी को गिरफ्तार किया था. सिद्धकी पर आरोप है कि मदनपुर खादर गांव में स्थित करीब 1.14 एकड़ जमीन, जिसकी बाजार दर 45 करोड़ रुपए है, उसे सिद्दिकी ने तरबिया एजुकेशन फाउंडेशन के जरिए फर्जी दस्तवेज़ों के आधार पर अधिग्रहित किया. कागज पर इसकी कीमत 75 लाख रुपए दिखाई गई थी.

ईडी ने जांच के बाद दावा किया है कि सिद्दिकी ने रसूखदार लोगों के साथ मिलकर पूरी साजिश रची और सरकारी तंत्र को गुमराह कर जमीन की हेराफेरी को अंजाम दिया. इससे पहले ईडी ने दर्ज पहले मामले में अल फलाह यूनिवर्सिटी की लगभग 140 करोड़ रुपए की संपत्तियों को अटैच कर दिया है. यह विश्वविद्यालय 10 नवंबर को लाल किला कार ब्लास्ट के बाद एजेंसियों के राडार पर आया था.

दाखिल चार्जशीट में अल फलाह यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्धिकी और अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट को आरोपी बनाया गया है. अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया था.

शिक्षा के नाम पर फर्जीवाड़े का खुलासा

ईडी का आरोप है कि अल फलाह ट्रस्ट द्वारा संचालित शिक्षण संस्थानों ने बिना वैध मान्यता और मानक पूरे किए छात्रों को दाखिला देकर उनसे फीस वसूली. अपराध से प्राप्त धन का एक हिस्सा फरीदाबाद के धौज क्षेत्र में स्थित इस विश्वविद्यालय की इमारतें, स्कूलों, विभागों से संबंधित इमारतें और हॉस्टल को जब्त कर लिया गया है. सिद्धिकी पर करीब 415 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का मामला दर्ज है. सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया था कि छात्रों को आकर्षित करने के लिए फर्जी एनएएसी और यूजीसी मान्यता के दावा किया गया है. ईडी ने यूनिवर्सिटी द्वारा वसूले गए 415 करोड़ रुपए की फीस को अपराध से अर्जित धन बताया है.

ईडी ने यह भी कहा था कि आरोपी सिद्धिकी पूरे वित्तीय संचालन को नियंत्रित करता था. वही बचाव पक्ष की ओर से पेश वकील ने दर्ज सभी एफआईआर को झूठा और मनगढ़ंत बताया था. माना जा रहा है कि इन कंपनियों का इस्तेमाल फर्जी लेनदेन और हवाला कारोबार में किया गया.

अल फलाह समूह के 19 ठिकानों पर ईडी की छापेमारी

अल फ़लाह ट्रस्ट और उससे जुड़े संस्थानों का भी पूरा ब्यौरा खंगाला जा रहा है. उसकी 9 शेल कंपनियां एक ही पते पर पाई गई, लेकिन उनमें कोई काम नहीं हो रहा था. सिद्धिकी को यूनिवर्सिटी परिसर में मिले साक्ष्यों की जांच और विश्लेषण के बाद ईडी ने गिरफ्तार किया गया हैं. अल फलाह यूनिवर्सिटी के परिसरों और अल फ़लाह समूह के प्रमुख व्यक्तियों के आवासीय परिसरों सहित 19 स्थानों पर तलाशी ली थी.

ईडी के मुताबिक साक्ष्यों से पता चलता है कि ट्रस्ट ने करोड़ों रुपए पारिवारिक स्वामित्व वाली संस्थाओं में स्थानांतरित किए हैं. ईडी तलाशी के दौरान 48 लाख रुपये से अधिक नकद, कई डिजिटल उपकरण और दस्तावेजों को जब्त किया है.

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-भारत एक्सप्रेस



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