दिल्ली के जामिया नगर इलाके के बटला हाउस बुलडोजर एक्शन का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुच गया है. सीजेआई बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मेंशन कर जल्द सुनवाई की मांग की गई. जिसपर कोर्ट अगले सप्ताह सुनवाई करेगा.
मामले की सुनवाई के दौरान बुलडोजर की कार्रवाई से पहले 26 मई को नोटिस चस्पा कर बेदखल करने की बात कही गई है. जबकि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि बुलडोजर की कार्रवाई करने से पहले 15 दिन का समय दिया जाए.
बटला हाउस की पुरानी बस्ती और डीडीए का दावा
बटला हाउस के मुरादी रोड़ पर करीब 50 से 60 साल पुरानी बस्ती है. जिसपर कार्रवाई के लिए नोटिस चस्पा किया गया है. दिल्ली विकास प्राधिकरण ने इन इलाकों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी कर चुकी है. डीडीए ने बटला हाउस के मुरादी रोड़ पर अपना दावा ठोका था, और मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है.
यह कदम सुप्रीम कोर्ट द्वारा 8 मई को दिए गए निर्देश के बाद उठाया गया है, जिसमें डीडीए को ओखला गांव में कानून के अनुसार अनधिकृत ढांचों को ध्वस्त करने के लिए कहा गया था. डीडीए का दावा है कि खसरा नंबर 279 का जमीन दिल्ली विकास प्राधिकरण का है और इस पर अवैध तरीके से घर बने हैं.
डीडीए द्वारा जारी नोटिस और निवासियों की प्रतिक्रिया
डीडीए द्वारा चस्पा किए गए नोटिस में कहा गया है कि सभी मकान 11 जून 2025 तक खाली कर दे, नही तो उसके बाद बुलडोजर की कार्रवाई की जाएगी. जबकि वहां के निवासियों का कहना है कि वह पिछले 50 सालों से वहां रह रहे है और अचानक डीडीए ने अपना दावा थोक दिया है.
इससे पहले दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के तैमूर नगर क्षेत्र में भी अवैध निर्माणों को लेकर बुलडोजर की कार्रवाई की गई थी. यह कार्रवाई दिल्ली हाई कोर्ट के 28 अप्रैल के आदेश के बाद की गई थी, जिसमें डीडीए को निर्देश दिया गया था कि तैमूर नगर नाले के जीर्णोद्धार कार्य में बाधा बन रही झुग्गियों को हटाया जाए. इसके चलते 5 मई को कार्रवाई शुरू की गई थी.
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-भारत एक्सप्रेस
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