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बिहार एसआईआर मामला: भूषण ने कहा राहुल गांधी के प्रेसवार्ता के एक दिन बाद ही ECI ने वोटर लिस्ट सेसर्च करने का विकल्प हटा दिया

सुप्रीम कोर्ट में बिहार एसआईआर मामले की सुनवाई जारी है. कोर्ट ने 11 दस्तावेजों की वैधता, वोटर कार्ड और आधार कार्ड की भूमिका, और हटाए गए 65 लाख लोगों की सूची पर बहस की.

Telangana News, Supreme Court, OBC Reservation

बिहार एसआईआर मामले में दायर विभिन्न याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में 14 अगस्त को भी सुनवाई जारी रहेगी. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की अध्यक्षता वाली पीठ सुनवाई कर रही है. सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि बिहार को लेकर ऐसी बातें मत कीजिए. आज भी सबसे ज्यादा आईएएस बिहार से आते है.

दस्तावेजों की वैधता पर बहस

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट को बताया कि एसआईआर में जिन 11 दस्तावेजों को शामिल किया गया है. बिहार में अधिकांश मतदाताओं के पास नही है. उन्होंने कहा कि वोटर कार्ड सबसे बेहतर पहचान पत्र है, उसे शामिल नहीं किया गया है. आधार जो सबके पास मौजूद है उसे भी शामिल नहीं किया गया है. उन्होंने कहा कि बिहार के पासपोर्ट मात्र एक या दो फीसदी मतदाताओं के पास है. कोर्ट ने कहा कि बिहार में 36 लाख पासपोर्ट धारकों की संख्या अच्छी प्रतीत होती है. निवास प्रमाणपत्र किसी के पास नहीं मिलेगा. जिनके पास जमीन नहीं है उनके पास प्रॉपर्टी से संबंधित दस्तावेज कैसे मिलेगा. क्रेडिट कार्ड एक बेहतर दस्तावेज हो सकता था. लेकिन बिहार के इस पर बात करने का कोई मतलब नही है.

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि कानून में कोई रोक नहीं है कि 50 साल का कोई व्यक्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करें. सिंघवी ने कहा कि जुलाई में इस तरह के अभ्यास के साथ आने की तात्कालिकता क्या है? जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अगर कोई कहता है कि सभी 11 दस्तावेज जरूरी हैं, तो यह एंटी वोटर होगा. लेकिन अगर कहा जाता है कि 11 विश्वसनीय दस्तावेजों में से कोई भी दें? ये मतदाता के हित में है.

कुछ ही लोगों के पास दस्तावेज मौजूद

कोर्ट ने कहा कि इन 11 दस्तवेज़ों में से कोई एक जमा करना जरूरी है. इसपर असहमति जताते हुए सिंघवी ने कहा कि भले ही दस्तवेज़ों कि संख्या अधिक हो, लेकिन इनका कवरेज कम है. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि आधार कार्ड होने से यह साफ नही होता है कि कोई भारत का नागरिक है या नही. कोर्ट ने कहा कि इसे प्रमाणिकता प्रमाण पत्र के तौर पर नही माना जा सकता है, इसकी जांच जरूरी है. याचिकाकर्ता के वकील सिंघवी ने कहा कि दस्तावेज जांच को एंटी वोटर और अलगाववादी बता दिया, लेकिन जस्टिस बागची ने उनकी दलील को खारिज करते हुए कहा, हम आपका आधार से जोड़कर अलगाव का तर्क समझते हैं. लेकिन दस्तवेज़ों की संख्या की है, जो असल में मतदाताओं के हक में है, उनके खिलाफ नही.

जरा देखें कितने सारे दस्तवेज़ों से आप नागरिकता साबित कर सकते हैं. वही एडीआर की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट को बताया कि 65 लाख हटाए गए लोगों की जानकारी वेबसाइट पर नहीं दिए जाने पर कहा कि राहुल गांधी की प्रेसवार्ता के बाद ऐसा किया गया. इसपर कोर्ट ने कहा कि हमें प्रेसवार्ता की जानकारी नहीं है. भूषण ने कहा कि मेरी गुजारिश है कि कोर्ट कम से कम हटाए गए 65 लाख लोगों की सूची वेबसाइट पर डालने का आदेश दे.

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भारत एक्सप्रेस



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