सुप्रीम कोर्ट बीएस-6 वाहनों से संबंधित मामले में 28 जुलाई को सुनवाई करेगा. कोर्ट को यह तय करना है कि दिल्ली-एनसीआर में बीएस-6 मानक वाले पेट्रोल संचालित वाहनों के लिए उपयोग सीमा 15 वर्ष और डीजल संचालित वाहनों के लिए उपयोग सीमा 10 वर्ष होनी चाहिए.
सीजेआई बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ सुनवाई के लिए तैयार हो गया है. मेंशनिंग के दौरान वकील ने कहा कि सरकार दिल्ली में प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए वाहनों से निकलने वाले उत्सर्जन को रोकने को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले से तय सीमाओं में बदलाव नहीं कर सकता है. क्योंकि यह वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने से जुड़ें मामलों में न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन होगा.
वाहनों पर बैन लगाने की तैयारी
वर्ष 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में 10 साल से पुरानी डीजल गाड़ियों और 15 साल से पुरानी पेट्रोल गाड़ियों पर बैन लगाया था. साथ ही 2014 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को सार्वजनिक जगहों पर पार्क करने पर भी रोक लगा दी थी. लेकिन अब CAQM ने इसे और सख्त करते हुए 1 जुलाई 2025 से ईंधन पर पूरी रोक लगाने का आदेश दिया है. इस नियम का उद्देश्य वायु प्रदूषण को कम करना और स्वच्छ, सुरक्षित वाहनों को बढ़ावा देना है.
बता दें कि दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण लेबल को कम करने के लिए बीएस-6 डीजल गाड़ियों को प्रतिबंधित किया गया है. दिल्ली सरकार ने बीएस-6 वाहनों के बिक्री पर भी रोक लगाई है.
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