Rouse Avenue Court
दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर स्थित एक कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी भरने से 3 सिविल सेवा छात्रों की दर्दनाक मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट में अपनी क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी है. सीबीआई ने अपनी विस्तृत वैज्ञानिक जांच के बाद निष्कर्ष निकाला है कि दिल्ली नगर निगम (MCD) के किसी भी वरिष्ठ अधिकारी की ओर से ऐसी कोई प्रत्यक्ष लापरवाही या आपराधिक जिम्मेदारी साबित नहीं हुई है, जिसके कानूनी आधार पर उन शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ अदालत में मुकदमा चलाया जा सके.
जूनियर इंजीनियरों की घोर लापरवाही बेनकाब
सीबीआई ने विशेष अदालत को सूचित किया है कि जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों से यह साबित नहीं हुआ है कि एमसीडी के उच्च अधिकारियों ने अपने कर्तव्यों में ऐसी कोई जानबूझकर चूक की हो, जिसे इस भयावह हादसे का मुख्य कारण माना जाए. इसलिए, उन वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ मामला चलाने के लिए पर्याप्त कानूनी आधार नहीं मिला है.
हालांकि, इसके विपरीत सीबीआई ने जमीनी स्तर पर तैनात जूनियर इंजीनियर (JE) और सहायक अभियंता (AE) स्तर के स्थानीय अधिकारियों की घोर लापरवाही और प्रशासनिक सच को छिपाने की एक सोची-समझी साजिश को पूरी तरह से बेनकाब कर दिया है. जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया कि प्रारंभिक जांच में जिन अधिकारियों और अन्य मुख्य आरोपियों की आपराधिक भूमिका सामने आई थी, उनके खिलाफ अदालत में पहले ही चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल की जा चुकी है, जबकि कुछ दोषी एमसीडी अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शुरू की जा चुकी है. अब सीबीआई की ओर से दाखिल इस क्लोजर रिपोर्ट पर आगामी सुनवाई में कोर्ट विचार करेगा कि इसे कानूनी रूप से स्वीकार किया जाए या नहीं.
6 आरोपियों पर गैर इरादतन हत्या का केस
दाखिल चार्जशीट पर सुनवाई के दौरान सीबीआई ने कोर्ट के समक्ष स्पष्ट किया था कि वर्तमान में 6 मुख्य आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त और पुख्ता सामग्री मौजूद है. सीबीआई ने बताया कि वे दिल्ली हाई कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत मामले के हर पहलू की गहराई से जांच कर रहे हैं. चार्जशीट में जिन 6 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है, उनमें शामिल हैं:
- परविंदर सिंह
- ताजिंदर सिंह
- हरविंदर सिंह
- सरबजीत सिंह
- ‘राव आईएएस स्टडी सर्कल’ के सीईओ (CEO) अभिषेक गुप्ता
- देशपाल सिंह
इन सभी नामजद आरोपियों पर आपराधिक साजिश (क्रिमिनल कॉन्स्पिरेसी) और गैर इरादतन हत्या (Culpable Homicide not amounting to murder) से जुड़ी गंभीर धाराओं के तहत चार्जशीट दाखिल की गई है. सीबीआई ने अपनी जांच में बड़ा खुलासा करते हुए कहा था कि राव आईएएस के मालिक ने पूरी जानकारी होने के बावजूद जानबूझकर व्यावसायिक लाभ के लिए बेसमेंट का इस्तेमाल लाइब्रेरी के रूप में किया था.
दिल्ली पुलिस का दावा सीबीआई जांच में खारिज
एक बड़े घटनाक्रम में, सीबीआई ने एसयूवी (SUV) गाड़ी के ड्राइवर मनुज कथूरिया के खिलाफ कोई चार्जशीट दाखिल नहीं की है. जांच एजेंसी ने मनुज कथूरिया के खिलाफ लगाए गए सभी आपराधिक आरोपों को पूरी तरह से रद्द कर दिया था.
इससे पहले, मामले की शुरुआती जांच करने वाली दिल्ली पुलिस ने अपनी एफआईआर (FIR) में दावा किया था कि मनुज कथूरिया बेहद तेज और लापरवाही से गाड़ी चला रहे थे, जिसकी वजह से पानी का भारी दबाव बना और कोचिंग सेंटर का मुख्य लोहे का गेट टूट गया, जिससे बेसमेंट में पानी भर गया. हालांकि, सीबीआई ने अपनी तकनीकी जांच में इस थ्योरी को खारिज कर दिया.
‘हम जंगल में रह रहे हैं…’
उल्लेखनीय है कि दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता और स्थानीय पुलिस की जांच पर असंतोष देखते हुए केस को तुरंत सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया था. सीबीआई ने इस मामले में आपराधिक लापरवाही, कर्तव्यों की घोर उपेक्षा और भ्रष्ट आचरण समेत विभिन्न कथित अपराधों के तहत मामला दर्ज किया है.
केस ट्रांसफर करते हुए हाई कोर्ट ने बेहद सख्त टिप्पणी की थी कि इस हादसे को केवल एक दुर्घटना मानकर नहीं छोड़ा जा सकता, बल्कि इसे ध्यान में रखकर पूरे सिस्टम की ‘लार्जर पिक्चर’ (व्यापक परिदृश्य/बड़ी तस्वीर) पर बात होनी चाहिए.
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सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने दिल्ली की बदहाल नागरिक व्यवस्था पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा था कि देश की राजधानी दिल्ली में लोग आज बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण आग और पानी से मर रहे हैं; ऐसा लग रहा है कि हम किसी आधुनिक शहर में नहीं बल्कि जंगल में रह रहे हैं. वकील ने अदालत को यह भी बताया था कि राजेंद्र नगर के बेसमेंट में नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से कई अवैध लाइब्रेरी चलाई जा रही हैं, लेकिन एमसीडी प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई. याचिकाकर्ता ने कोर्ट में यह गंभीर और कड़वा सवाल भी उठाया था कि आखिर एमसीडी इस पूरे माफिया तंत्र पर क्यों शांत बैठी है? वहां कई मौजूदा प्रशासनिक आयुक्तों की बेनामी संपत्तियां मौजूद हैं.
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