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जयपुर पोलो ग्राउंड को केंद्र सरकार ने अपने कब्जे में लिया, कोर्ट ने बेदखली पर रोक लगाने से किया था इनकार

पटियाला हाउस कोर्ट ने इंडियन पोलो एसोसिएशन को राहत देने से इनकार करते हुए बेदखली आदेश पर रोक लगाने से मना कर दिया, जिसके बाद केंद्र सरकार ने दिल्ली के रेस कोर्स इलाके में स्थित जयपुर पोलो ग्राउंड को अपने कब्जे में ले लिया.

UAPA Case

पटियाला हाउस कोर्ट से रोक लगाने से इनकार करने के बाद केंद्र सरकार ने दिल्ली के रेस कोर्स इलाके में स्थित जयपुर पोलो ग्राउंड को अपने कब्जे में ले लिया है. कोर्ट ने इंडियन पोलो एसोसिएशन के खिलाफ बेदखली के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था.

जज धीरेंद्र राणा ने कहा कि प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज पहले ही ऐसी राहत देने से मना कर चुके हैं और दिल्ली हाई कोर्ट ने भी कोई अंतरिम सुरक्षा नहीं दी है. इसलिए यह कोर्ट सुनवाई की अगली तारीख तक भी बेदखली ऑर्डर पर किसी भी तरह की रोक लगाने के पक्ष में नही है. कोर्ट 17 जून को सुनवाई करेगा. इसके एक दिन बाद ही केंद्र सरकार ने दिल्ली के रेस कोर्स इलाके में स्थित जयपुर पोलो ग्राउंड को कब्जे में ले लिया है.

कोर्ट ने बेदखली पर रोक लगाने से किया था इनकार

केंद्र सरकार ने 20 मई को जयपुर पोलो ग्राउंड खाली करने का नोटिस जारी किया था. इंडियन पोलो एसोसिएशन ने पटियाला हाउस कोर्ट में याचिका दायर की, लेकिन  कोर्ट ने रोक नही लगाया था, जिसके बाद मामला हाई कोर्ट पहुचा था. जिस पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि एनडीएमसी इलाके में जो थोड़ी बहुत हरियाली बची है, अगर उसे भी खत्म कर दिया गया तो दिल्ली का दम घुट जाएगा और हम सब घुट-घुट कर मरेंगे. इसके साथ ही कोर्ट ने निचली अदालत को जल्द सुनवाई करने को कहा था. लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि परिसर सरकारी स्वामित्व वाली भूमि है.

केंद्र सरकार द्वारा चस्पा किए गए नोटिस में यह भी चेतावनी दी गई है कि अगर कोई व्यक्ति या संस्था यहां अवैध कब्जा, अतिक्रमण, निर्माण गतिविधि या अन्य गैर-कानूनी उपयोग करने का प्रयास करती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. बता दें कि केंद्र सरकार और इंडियन पोलो एसोसिएशन के बीच करीब 15.20 एकड़ में फैले इस ग्राउंड के कब्जे को लेकर चल रहे विवाद के बीच हुआ है.

आईपीए ने 20 मई 2026 के उस बेदखली आदेश को कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसका उन्हें ग्राउंड खाली करने का निर्देश दिया गया था. 1930 के आसपास जयपुर के तत्कालीन महाराजा ने यह जमीन दिल्ली पोलो क्लब को उपहार में दिया था. 24 फरवरी 1051 को केंद्रीय लोक निर्माण ने 20 साल के लिए इसे क्लब को औपचारिक रूप से लीज पर दिया था.

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-भारत एक्सप्रेस



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