राजस्थान के नागौर जिले के वर्ष 2015 के बहुचर्चित डांगावास हत्याकांड मामले में करीब 11 साल बाद एक बड़ा न्यायिक फैसला सामने आया है. बुधवार (5 अगस्त 2026) को मेड़ता की एससी-एसटी (SC-ST) विशिष्ट अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी करते हुए सभी 40 आरोपियों को आरोपों से बाइज्जत बरी कर दिया.
अदालत का फैसला आने के बाद डांगावास गांव और आसपास के क्षेत्रों में लोगों ने खुशी जताई और एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया.
जमीन विवाद में हुई थी 6 लोगों की मौत
यह मामला मई 2015 का है, जब नागौर जिले के डांगावास गांव में एक खेत के मालिकाना हक को लेकर दो पक्षों के बीच खूनी संघर्ष हो गया था. इस हिंसा में छह लोगों की जान चली गई थी, जिनमें पांच लोग और एक ग्रामीण रामपाल पूरी शामिल थे.
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई थी. जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने इस मामले में कुल 40 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया था.
साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर हुआ फैसला
मेड़ता की विशेष अदालत में करीब 11 वर्षों तक चली लंबी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 82 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए और कई दस्तावेज पेश किए गए. वहीं, बचाव पक्ष की ओर से एडवोकेट कमल आचार्य, महिपाल लटियाल, महेंद्र चौधरी और बाबूलाल गोरा ने करीब आठ गवाह और 35-36 दस्तावेज रिकॉर्ड पर रखे.
दोनों पक्षों की बहस सुनने तथा उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों की गहन समीक्षा के बाद अदालत ने सभी 40 आरोपियों को दोषमुक्त करार देते हुए बरी करने का आदेश सुनाया.
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