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Delhi News: तुर्कमान गेट के पास पुलिस-फोर्स को ईंट-पत्थर मारने के मामले में उबैदुल्ला को अदालत से झटका, सलाखों के पीछे ही रहेगा

दिल्ली हाई कोर्ट ने तुर्कमान गेट मामले में आरोपी उबैदुल्ला की निचली अदालत से मिली जमानत को रद्द कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत ने जमानत का ठोस विश्लेषण नहीं किया और आदेश बिना तर्क का था.

दिल्ली के तुर्कमान गेट स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद हिंसा मामले में आरोपी उबैदुल्ला को दिल्ली हाई कोर्ट से झटका लगा है. जस्टिस प्रतीक जालान ने उबैदुल्ला को निचली अदालत से मिली जमानत को रद्द कर दिया है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अदालत किसी व्यक्ति को दी गई स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करने में बेहद सतर्क रहती है. लेकिन यह एक असाधारण मामला था, जहां उबैदुल्ला एक स्ट्रीट वेंडर को एक अष्पष्ट और तर्कहीन आदेश के माध्यम से जमानत दी गई थी.

कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि निचली अदालत ने न तो जमानत से जुड़े मानकों का प्राथमिकी विश्लेषण किया और न ही यह बताया कि किन आधारों पर आरोपित को राहत दी जा रही है.

हाई कोर्ट ने जमानत रद्द किया

अदालत ने निचली अदालत के आदेश को अत्यंत संछिप्त और बिना तर्क वाला बताया है. हाई कोर्ट ने निचली अदालत को आरोपी की जमानत पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि यदि दोबारा सुनवाई के बाद आरोपित को जमानत दी जाती है, तो पहले से जमा किए गए जमानत बॉन्ड पर ही विचार किया जाएगा. तीस हजारी कोर्ट ने 20 जनवरी को जमानत दे दिया है. निचली अदालत में जमानत पर सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मुख्य रूप से सीसीटीवी फुटेज और एक सह-आरोपित के बयान पर भरोसा जताते हुए आरोप लगाया था कि उबैदुल्ला हिंसक भीड़ का हिस्सा था और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया.

आरोपी के वकील एम. के. मलिक और ए. एफ. फैजी ने जोर देकर कहा कि प्राथमिकी में कई अन्य लोगों का नाम दर्ज हैं, लेकिन उबैदुल्ला का नाम नहीं है. उन्होंने दलील दी कि उसके खिलाफ पूरा मामला केवल एक ऐसे सामान्य पहचान गवाह के बयान पर आधारित है, जिसने सभी को एक साथ पहचानने का दावा किया है, और यह बिना ठोस सबूत के अनुमान के आधार पर की गई एक तरह की तुक्केबाजी भरी जांच है. साथ ही, सीसीटीवी कैमरों की फुटेज पर पक्षपातपूर्ण भरोसा किया गया है. जिसमें कोई आपराधिक कृत्य दिखाई नही दे रहा है.

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-भारत एक्सप्रेस



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