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कॉपरेटिव बैंक घोटाला मामले में दोषी दतिया विधायक राजेंद्र भारती की सजा के खिलाफ अपील, दिल्ली हाई कोर्ट में 28 अप्रैल को होगी सुनवाई

दिल्ली हाई कोर्ट 28 अप्रैल को मध्य प्रदेश के दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की अपील पर सुनवाई करेगा. यह अपील ग्रामीण विकास बैंक धोखाधड़ी मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई सजा और दोषसिद्धि के खिलाफ दायर की गई है.

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कॉपरेटिव बैंक घोटाला मामले में दोषी मध्य प्रदेश के दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की ओर से दायर अपील पर दिल्ली हाई कोर्ट 28 अप्रैल को सुनवाई करेगा. मामले की सुनवाई के दौरान भारती की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार का जवाब अभी तक उन्हें नही मिला है. जवाब की कॉपी मिलने के बाद ही वह अपना दाखिल करेंगे.

राजेन्द्र भारती ने ग्रामीण विकास बैंक धोखाधड़ी केस में ट्रायल कोर्ट द्वारा मिली सजा और दोषसिद्धि के खिलाफ अपील दायर की है. भारती ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक अन्य अर्जी दाखिल कर अयोग्य घोषित होने के बाद खाली हुई सीट पर चुनाव का शेड्यूल जारी न करने का चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग की है.

लंबे समय से चल रहे एफडी घोटाले में फैसला

राऊज एवेन्यु कोर्ट ने राजेंद्र भारती और बैंक के कर्मचारी कर्मचारी रघुवीर शरण प्रजापति को राऊज एवेन्यु कोर्ट ने तीन साल की सजा सुनाई है. साथ ही कोर्ट ने दोनों को 50 हजार रुपए के निजी मुचलके पर जमानत दे दिया था. कोर्ट ने दोनों को निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अपील दायर करने के लिए 30 दिन का समय दिया था. कोर्ट ने फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) घोटाला मामले में राजेंद्र भारती को भारतीय दंड संहिता की धारा 120B, 420, 467, 468 और 471 के तहत दोषी करार दिया था. 25 साल पुराने घोटाले मामले में यह सजा सुनाई है.

विधायक राजेंद्र भारती ने अपनी मां के नाम बैंक में 10.50 लाख रुपए की एफडी तीन साल के लिए कराई थी, जिस पर 13.50 फीसदी ब्याज मिल रहा था. आरोप है कि बाद में एफडी की अवधि तीन साल से बढ़ाकर 15 साल कर दी गई. इसी बैंक के कर्मचारी नरेंद्र सिंह ने कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई थी. कोर्ट ने दर्ज शिकायत को गंभीरता से लेते हुए इसे धोखाधड़ी का मामला माना और केस दर्ज करने के आदेश दिए. जिस समय यह धोखाधड़ी का मामला सामने आया था उस समय राजेंद्र भारती बैंक के संचालक मंडल के अध्यक्ष थे.

बैंक कर्मचारी के साथ मिलीभगत

अभियोजन पकड़ के मुताबिक राजेंद्र भारती ने अपनी पदीय स्थिति और अधिकारों का दुरूपयोग करते हुए बैंक कर्मचारी रघुवीर शरण प्रजापति के साथ मिलकर बैंक दस्तवेज़ों लेजर बुक, एफडी स्लिप और रसीद में काट-छांट कर एफडी की अवधि 3 साल से बढ़ाकर 10 और फिर 15 वर्ष कर दी. इसका उद्देश्य 13.50 फीसदी ब्याज दर का लाभ लंबे समय तक अपनी मां और संबंधित संस्था को दिलाना था.

जांच में सामने आया कि इस हेराफेरी के जरिए वर्ष 1999 से.2011 तक प्रतिवर्ष लगभग 1.35 लाख रुपए का अनुचित लाभ लिया गया, जिससे बैंक को आर्थिक नुकसान हुआ.

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-भारत एक्सप्रेस



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