ताज पैलेस उदयपुर को लेकर दायर याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है. कोर्ट ने द इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड (आईएचसीएल) की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद इंस्टाग्राम विडियो को हटाने का आदेश दिया है. जस्टिस मनमीत प्रीतम अरोड़ा ने यह आदेश दिया है. कोर्ट 23 मार्च 2026 को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया यह वीडियो झूठा प्रतीत होता है.
ताज होटल की प्रतिष्ठा को खतरा
इस तरह के वीडियों से आईएचसीएल की प्रतिष्ठा का उल्लंघन पहुंच रहा है और ताज लेक पैलेस उदयपुर की छवि को जनता के सामने गलत तरीके से पेश किया गया है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यदि ऐसा काल्पनिक वीडियो प्रसारित होता रहा तो ताज होटल को क्षति पहुचेगी. इसलिए इंस्टाग्राम पर मौजूद वीडियों को 36 घंटे के भीतर हटाने का आदेश दिया है. साथ ही कोर्ट ने वीडियो प्रसारित करने वाले अज्ञात व्यक्ति को निर्देश दिया गया है कि वह ऐसे किसी भी अन्य कंटेंट को प्रकाशित या प्रसारित न करे, जो ताज की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाता हो.
कोर्ट ने अज्ञात व्यक्ति को समन जारी किया
साथ ही कोर्ट ने अज्ञात व्यक्ति को समन जारी करने का आदेश भी दिया है. आईएचसीएल टाटा समूह की कंपनी है और ताज होटल शृंखला का संचालन करती है. उन्होंने अदालत को बताया कि Travelagio नामक इंस्टाग्राम अकाउंट पर वीडियो अपलोड कर दावा किया गया था कि होटल के कर्मचारियों ने 2018 में अमीर मेहमानों को जहर देकर मार दिया गया और मामले को दबा दिया गया. जो सरासर गलत और झूठा है.
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि यह वीडियो पूरी तरह से काल्पनिक और मनगढ़ंत है, लेकिन सोशल मीडिया पर इसे 20000 से अधिक लोगों ने देखा है, जिससे ताज होटल की प्रतिष्ठा को नुकसान हुआ है.
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-भारत एक्सप्रेस
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