दिल्ली हाई कोर्ट ने एलपीजी गैस सिलेंडर की कमी और काला बाजारी को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने कहा यह मामला सरकार और प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में आता है. सरकार अपनी ओर से हर संभव कोशिश कर रही है. ऐसे में कोर्ट अपनी ओर से कोई ऐसा निर्देश नही दे सकता जिसपर अमल करना ठीक नही हो. अदालत ने यह आदेश वकील राकेश कुमार मित्तल की ओर दायर जनहित याचिका यह आदेश दिया है.
उन्होंने कोर्ट में कहा कि दिल्ली में एलपीजी सिलेंडरों की भारी कमी है, जिसके चलते बाजार में सिलेंडर की काला बाजारी हो रही है. जो सिलेंडर लगभग एक हजार रुपए में मिलता है, वही ब्लैक मार्केट में 5 हजार से ज्यादा में बेचा जा रहा है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारत में गैस की कमी होने के बावजूद सरकार गैस की कमी होने के बावजूद सरकार गैस का निर्यात होने दे रही है.
मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय ने कहा कि कोर्ट अपनी ओर से सरकार को एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई बढ़ाने का आदेश नही दे सकता. यह काम सरकार और प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में आता है. कोर्ट ने कहा कि वह अपनी ओर से कोई ऐसा आदेश नहीं दे सकता जो व्यवहारिक रूप से संभव न हो. ऐसे मामलों के उपयुक्त कार्रवाई करना सरकार के जिम्मे आता है.
ऐसे आदेश व्यवहारिक रूप से लागू नहीं किए जा सकते- कोर्ट
कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसा आदेश देना वैसे ही होगा जैसे कोर्ट सरकार को कह दे कि दो महीने में भारत से गरीबी खत्म कर दो. जाहिर है, इस तरह के आदेश को लागू नहीं किया जा सकता. जबकि जस्टिस करिया ने कहा कि सरकार पहले से ही स्थिति को सुधारने के लिए हर संभव कदम उठा रही है. कोर्ट ने कहा कि यदि सरकार कोई कार्रवाई नहीं कर रही तो भी कोर्ट सरकार को निर्देश नही दे सकता. उन्होंने कहा कि कोर्ट इस मामले में दखल नही दे सकता है.
कोर्ट ने कहा आर्थिक नीति तय करना सरकार की जिम्मेदारी है. कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता को इस मसले पर ज्ञापन देने की छूट दे दी है.
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-भारत एक्सप्रेस
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