सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के खान मार्केट के पास सुजान सिंह पार्क फ्लैट्स से सरकारी अधिकारियों को बेदखल करने के आदेश को रद्द कर दिया है. जस्टिस संजय करोल और जस्टिस पी के मिश्रा की पीठ ने यह आदेश दिया है. अदालत ने 2022 में दायर केंद्र सरकार की अपील पर यह फैसला दिया है.
दायर याचिका में दिल्ली हाई कोर्ट के बेदखली की अनुमति देने के आदेश को चुनौती दी गई थी. जनवरी 2020 में दिल्ली कोर्ट ने अतिरिक्त किराया नियंत्रण न्यायाधिकरण के उस फैसले को बरकरार रखा था. जिसमें केंद्र को प्रतिवादी सर शोभा सिंह एंड संस प्राइवेट लिमिटेड को बकाया किराए का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था.
हाई कोर्ट ने बकाया किराया चुकाने का दिया था निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा है कि सरकारी अनुदान अधिनियम किराए का भुगतान न करने के कारण बेदखली का प्रावधान नहीं करता है. केंद्र सरकार ने जनवरी 2020 के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जिसमें उसे शोभा सिंह एंड संस के बकाया किराए का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था. वही शोभा सिंह एंड संस ने इस संबंध में अतिरिक्त किराया नियंत्रण के समक्ष बेदखली याचिका दायर की थी, जहां अतिरिक्त किराया नियंत्रण ने उन्हीं के पक्ष में फैसला सुनाया था.
वर्ष 1994 में गवर्नर जनरल इन काउंसिल द्वारा सरदार बहादुर सर शोभा सिंह एंड संस प्राइवेट लिमिटेड के साथ उत्तर और दक्षिण सुजान पार्क, नई दिल्ली में स्थित दो भूखंडों के लिए इस सहमति पर लीज की थी कि 50 फीसदी तक फ्लैट सरकार को मामूली दरों पर किराए पर दिए जाएंगे.
आधे फ्लैट भारत सरकार को किराए पर देने की थी शर्त
बता दें कि देश की स्वतंत्रता से पहले ब्रिटिश सरकार ने शोभा सिंह को 1945 में दिल्ली में 7.58 एकड़ जमीन सशर्त लीज पर दी थी. यह जमीन सुजान सिंह पार्क उत्तर और सुजान सिंह पार्क दक्षिण के रूप में विकसित की गई. रियल एस्टेट फर्म ने 84 फ्लैट बनाए. लेकिन शर्त यह थी कि वह आधे फ्लैट भारत सरकार को किराए पर देगा और भारत सरकार किराया तय करेगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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