दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि उसके पास पीएफआई की उस याचिका पर सुनवाई करने का अधिकार है, जिसमें यूएपीए ट्रिब्यूनल द्वारा संगठन पर लगाए गए पांच साल के प्रतिबंध को बरकरार रखने के आदेश की चुनौती दी गई है.
PFI खटखटाया दिल्ली HC का दरवाजा
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की पीठ ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. कोर्ट 20 जनवरी को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 27 सितंबर 2022 को अधिसूचना जारी किया गया था. दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश दिनेश कुमार शर्मा की अध्यक्षता वाले यूएपीए न्यायाधिकरण ने 21 मार्च 2023 को इस प्रतिबंध की पुष्टि की थी. पीएफआई ने यूएपीए न्यायाधिकरण के मार्च 2023 के आदेश के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.
याचिका सुनवाई योग्य नहीं- ASG
सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2023 में कहा था कि पीएफआई के लिए पहले हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाना चाहिए. जिसपर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने दलील देते हुए कहा था कि पीएफआई की याचिका सुनवाई योग्य नहीं है. क्योंकि यूएपीए न्यायाधिकरण दिल्ली हाई कोर्ट के एक कार्यरत न्यायाधीश द्वारा संचालित है, और इस आदेश को संविधान के अन्य 226 के तहत चुनौती दी जा सकती है.
PFI 5 साल के लिए गैर कानूनी
केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 27 सितंबर 2022 को अधिसूचना जारी किया गया था. पीएफआई और उसके सहयोगियों या मोर्चो को तत्काल प्रभाव से 5 साल के लिए गैर कानूनी संघ घोषित किया गया है. यूएपीए की धारा 3(1) के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए केंद्र ने पीएफआई ही नहीं, कई अन्य संगठनों पर भी बैन लगाया है. इनमें ऑल इंडिया इमाम काउंसिल, नेशनल कन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन, रिहैब फाउंडेशन इंडिया, नेशनल विमंस फ्रंट, जूनियर फ्रंट जैसी संस्थाएं शामिल है.
-भारत एक्सप्रेस
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