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कोमा में पड़े फौजी पति के शुक्राणु निकालने की मिली इजाजत, गीता के श्लोक से दिल्ली हाई कोर्ट ने समझाया

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले में कोमा में पड़े सैनिक के शुक्राणु निकालने और उसे आईवीएफ के लिए सुरक्षित रखने की अनुमति दी है.

Delhi High Court Mother Daughter Relationship Attempt to Murder Case

दिल्ली हाई कोर्ट ने कोमा में पड़े सैनिक के शुक्राणु को निकालने की अनुमति दे दी है. कोर्ट ने आईवीएफ के लिए पूर्व सहमति को पर्याप्त माना है. श्रीमद भागवत गीता का हवाला देते हुए जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने निर्देश दिया कि अधिकारी केवल इस आधार पर पत्नी को इस उपचार से वंचित नही कर सकते कि पति की लिखित सहमति नही थी. कोर्ट ने यह भी कहा कि यह प्रक्रिया अन्य वैधानिक अनुपालनों और पति की चिकित्सीय स्थिति के अधीन होगी.

महिला ने एक साल से कोमा में पड़े पति के शुक्राणु को सुरक्षित रखने की मांग को लेकर याचिका दायर की थी. ताकि भविष्य में वह मां बन सके. डॉक्टरों के मुताबिक उनकी हालत बेहद गंभीर है और वे लाइफ सपोर्ट पर हैं.

विशेषज्ञ चिकित्सा समिति गठित करने का अनुरोध

मामले की सुनवाई के दौरान महिला की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि उनके पति मार्च 2025 से आईसीयू में भर्ती है. डॉक्टरों के अनुसार उनकी हालत बेहद नाजुक है. महिला ने कहा था कि अगर देरी हुई तो शुक्राणु की गुणवत्ता खराब हो सकती है और महिला के लिए अपने पति के बच्चे की मां बनने का मौका खत्म हो सकता है. महिला ने दिल्ली हाई कोर्ट से अनुरोध किया था कि एक विशेषज्ञ चिकित्सा समिति गठित की जाए, जो शुक्राणु रिट्रीवल (निकासी) और क्रायोप्रिजवेंशन (जमाकर सुरक्षित रखने) की प्रक्रिया को सुरक्षित तरीके से अंजाम दे सके.

सर्जिकल स्पर्म रिट्रीवल क्या है?

डॉक्टर विकास के मुताबिक, इस प्रक्रिया को सर्जिकल स्पर्म रिट्रीवल कहते है. इसमें एक पतली सुई की मदद से टेस्टिस से स्पर्म निकाला जाता है. इसके बाद उसे बहुत ठंडे तापमान, करीब माइनस 196 डिग्री पर सुरक्षित रखा जाता है, ताकि वह लंबे समय तक खराब न हो. इस तरीके को क्रायोप्रिजवेंशन कहा जाता है. बाद में आईवीएफ जैसी तकनीक से इस स्पर्म का इस्तेमाल करके बच्चा पैदा किया जा सकता है.

पिछले साल 28 जनवरी 2025 को दिल्ली हाई कोर्ट ने राजधानी दिल्ली में आत्महत्या करने वाले एक व्यक्ति पर पोस्टमार्टम स्पर्म रिट्रीवल प्रक्रिया अपनाने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने यह आदेश मृतिका के माता-पिता और बहन की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद दिया है.

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-भारत एक्सप्रेस



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