दिल्ली हाई कोर्ट ने महिला पहलवान विनेश फोगाट को भारतीय कुश्ती महासंघ द्वारा जारी किए गए कारण बताओ नोटिस पर दो सप्ताह में में विचार करने को कहा है. जस्टिस अमित महाजन की बेंच ने कहा कि अनुशासनात्मक कार्यवाही को लेकर बनी अनिश्चितता, किसी भी खिलाड़ी की प्रतियोगिताओं से पहले की मानसिक तैयारी पर असर डाल सकती है.
हाई कोर्ट ने कहा कि प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए खिलाड़ी का मानसिक रूप से फिट और तनावमुक्त होना जरूरी है, ताकि उनके प्रदर्शन पर कोई बुरा असर न पड़े. हाई कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे इन कारण बताओ नोटिस पर दो सप्ताह के भीतर फैसला लें. हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया गया अगर दो सप्ताह बीतने के बाद कोई फैसला लिया जाता है, तो वह सुनवाई की अगली तारीख प्रभावित नही होगा.
कोर्ट ने अधिकारियों से अगली सुनवाई से पहले जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. कोर्ट 20 जनवरी 2027 को मामले में अगली सुनवाई करेगा. पिछली सुनवाई के दौरान डब्ल्यूएफआई की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया था एशियन गेम्स चयन ट्रायल में हिस्सा लेने से जुड़ी विनेश फोगाट की मांग अब अप्रासंगिक हो चुकी है. जबकि विनेश फोगाट की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया था उनकी याचिका सिर्फ ट्रायल तक सीमित नहीं है, बल्कि डब्ल्यूएफआई की चयन प्रक्रिया से जुड़े कई सवालों को लेकर भी है.
इसपर कोर्ट ने कहा था यदि यह चयन नीति को चुनौती देना चाहती है तो इसके बाद अलग से नई याचिका दायर कर सकती है. फोगाट के वकील ने कोर्ट को यह भी बताया था कि एशियन गेम्स ट्रायल के दौरान उनके व्यवहार को लेकर डब्ल्यूएफआई ने उन्हें नया कारण बताओ नोटिस जारी किया है.
एशियाई खेलों के ट्रायल में हिस्सा लेने की मिली थी अनुमति
भारतीय कुश्ती महासंघ के वकील ने कहा था कि नोटिस पर फैसला लेने से पहले फोगाट को अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा. अदालत को बताया गया है अदालती आदेशों के तहत फोगाट को एशियाई खेलों के ट्रायल में हिस्सा लेने की इजाजत दी गई थी. भारतीय कुश्ती महासंघ ने एंटी-डोपिंग नियमों के तहत सन्यास से लौटने वाले एथलीटों के लिए जरूरी 6 महीने की नोटिस की अवधि का हवाला देकर9 मई को फोगाट को कारण बताओ नोटिस जारी किया था और उन्हें 26 जून 2026 तक घरेलू खेल प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लेने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था.
अपनी याचिका में विनेश फोगाट ने डब्ल्यूएफआई की चयन नीति और उस सर्कुलर को चुनौती दी थी, जिसमें एशियाई खेलों के चयन ट्रायल में केवल कुछ निर्धारित प्रतियोगिताओं के पदक विजेताओं को ही पात्र माना गया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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