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दिल्ली हाईकोर्ट: डीपीएस द्वारका ने निलंबित छात्रों का निलंबन लिया वापस, फैसले पर कोर्ट जल्द देगा आदेश

दिल्ली हाईकोर्ट में द्वारका डीपीएस स्कूल द्वारा बढ़ी हुई फीस न देने पर छात्रों के निष्कासन मामले में सुनवाई हुई. स्कूल ने कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर निलंबन वापस लेने की जानकारी दी. कोर्ट ने उचित आदेश देने की बात कही.

delhi high court
Edited by Akansha

दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा द्वारका के दिल्ली पब्लिक स्कूल के बच्चों के अभिभावकों की ओर से दायर याचिका पर फैसला सुनाते समय डीपीएस की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि जिन छात्रों को स्कूल ने निलंबित कर दिया था। अब उसे वापस ले लिया गया है, और इसको लेकर सोमवार को हलफनामा दाखिल कर दिया है.

जस्टिस सचिन दत्ता की कोर्ट ने कहा कि डीपीएस द्वारा लिए गए फैसले को ध्यान में रखते हुए उचित आदेश पारित करूँगा. यह फैसला दिल्ली हाई कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा। इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने सभी पक्षों की जिरह के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था.

मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग ने हाई कोर्ट को बताया था कि सरकार ने डीपीएस द्वारका से निष्कासित सभी 32 छात्रों को दोबारा दाखिला देने का आदेश दिया था. बढ़ा फीस न भरने की वजह से सभी छात्रों को स्कूल ने निष्काषित कर दिया गया था. जिसके बाद अभिभावकों ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था, जिनकी याचिका पर कोर्ट ने दिल्ली सरकार से जवाब मांगा था.

दिल्ली सरकार ने स्कूल से यह भी कहा था कि निष्काषित छात्रों के साथ किसी तरह का भेदभाव न किया जाए. इससे पहले 102 छात्रों के अभिभावक ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर स्कूल की मनमानी और न्यायिक आदेशों के उल्लंघन की जांच की मांग की थी. याचिका में दिल्ली सरकार एवं उपराज्यपाल (एलजी) से उस स्कूल को अपने नियंत्रण में लेने का आग्रह किया है.

अभिभावकों ने इस मुद्दे पर दाखिल याचिका में कहा है कि पिछले कुछ सालों में स्कूल ने अभिभावकों से बढ़ी हुई फीस वसूलने के लिए दबाव डाल रहा है. अभिभावकों ने यह भी कहा है कि जिन लोगों ने बढ़ी हुई फीस जमा नहीं किया है उसके साथ दंडात्मक तौर तरीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है. स्कूल प्रशासन ने अपने परिसर में बाउंसर रखकर अव्यवहारिक गंदे और अमानवीय तरीके का सहारा लिया है. वह यह दर्शना चाह रहा है कि बाउंसर शिक्षकों की तुलना में बच्चों से बेहतर तरीके से संभाल सकते हैं.

जस्टिस विकास महाजन ने वैसे अभिभावकों से फिलहाल बढ़ी हुई फीस का 50 फीसदी जमा करने का सुझाव दिया, लेकिन अभिभावकों ने यह कहते हुए इसे जमा करने से इनकार कर दिया कि उनके लिए पैसा जमा करना संभव नही है. अभिभावकों के वकील ने कहा कि स्कूल ने फीस में सात हजार रुपए की प्रति।माह की बढ़ोतरी की है. अब इसे नौ हजार रुपए मासिक बढ़ा दिया है. यह याचिका 102 अभिभावकों ने दाखिल की है. उसमें कहा गया है कि बढ़ी हुई फीस जमा नहीं करने के कारण बच्चों को परेशान किया जा रहा है.

-भारत एक्सप्रेस 


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