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बाढ़ से बबार्द फसलों की देखभाल के लिए एक हत्यारोपी की पैरोल की अवधि को दिल्ली हाई कोर्ट ने बढ़ाया

दिल्ली हाईकोर्ट ने बाढ़ से बर्बाद हुई फसलों की देखभाल के लिए हत्यारोपी प्रवीण राणा की पैरोल एक महीने के लिए बढ़ा दी है. अदालत ने कहा कि कृषि उसके परिवार की आजीविका का मुख्य स्रोत है.

Delhi High Court

दिल्ली हाईकोर्ट ने बाढ़ से बबार्द फसलों की देखभाल के लिए एक हत्यारोपी की पैरोल को एक महीने के लिए और बढ़ा दिया है. जस्टिस अरुण मोंगा ने यह आदेश दिया है. कोर्ट ने अभियुक्त प्रवीण राणा की पहले के शतरे के आधार पर ही पैरोल बढ़ाते हुए कहा कि खेती उसके परिवार की आजीविका का एकमात्र स्त्रोत है. उसकी विधवा मां व दो नाबालिग बच्चे पूरी तरह से उसी पर निर्भर हैं. भारी बारिश से बर्बाद हुए फसल की देखभाल करना जरूरी है. अदालत ने कहा कि फसल को हुआ नुकसान भगवान का कृत्य है और याचिकाकर्ता की मौजूदगी जरूरी है.

फसलों की सुरक्षा के लिए पैरोल बढ़ाना जरूरी

अदालत ने कहा कि अब पानी कम हो रहा है. कृषि भूमि को बहाल करने और उसकी सुरक्षा के लिए तत्काल उपाय करने की जरूरत है. इसके लिए पैसे की व्यवस्था तथा खाद व कीटनाशकों के अलावा अन्य सामग्रियों की जरूरत होगी. यह आरोपी के सक्रिय निगरानी के बिना नहीं होगा. ऐसा नहीं होने पर उसके आश्रित परिवार के सदस्यों का जीवन और शिक्षा खतरे में पड़ सकता है. इस दशा में अभियुक्त हाल ही में आई बाढ़ से प्रभावित अपनी फसलों की देखभाल करने के लिए पैरोल बढ़ाने का हकदार है. राणा को इससे पहले 18 अगस्त को दिल्ली हाई कोर्ट ने पैरोल पर रिहा करने का आदेश दिया था. पैरोल की अवधि खत्म होने के बाद उसने कोर्ट का दोबारा रुख किया और पैरोल की अवधि को बढ़ाने की कोर्ट से गुहार लगाई.

राणा की ओर से पेश वकील ने कहा कि भारी बारिश की वजह से खेती का काम अधूरा है और करीब डेढ़ एकड़ फसल बारिश से प्रभावित हुआ है. उसके वकील ने यह भी कहा कि राणा की विधवा मां और स्कूल जाने वाले दो बच्चे पूरी तरह से खेती से होने वाले आमदनी पर निर्भर है. जिसके बाद कोर्ट ने राणा की पैरोल की अवधि को बढ़ाने का फैसला लिया.

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-भारत एक्सप्रेस



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