दिल्ली हाईकोर्ट ने ओल्ड बारापुला के पास मद्रासी कैंप के निवासियों के पुनर्वास को लेकर कई दिशा निर्देश जारी किया है. जस्टिस प्रतिबा एम सिंह और प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ ने आदेश दिया है कि कैंप को ध्वस्त करने की प्रक्रिया 1 जून से शुरू होगी. यह याचिका जंगपुरा में जेजे क्लस्टर मद्रासी कैंप के निवासियों की ओर से दायर की गई थी. कोर्ट ने कहा कि ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया व्यवस्थित ढंग से होनी चाहिए और मद्रासी कैंप के निवासियों का पुनर्वास भी आवश्यक है, ताकि बरापुला नाले की सफाई और अवरुद्धता को दूर किया जा सके.
कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि यह भूमि सार्वजनिक है, जिस पर अवैध कब्जा किया गया है, और निवासियों को पुनर्वास के अलावा कोई अन्य अधिकार प्राप्त नहीं है. कोर्ट ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए), दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूसीआईबी), नगर निगम (एमसीडी), लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और दिल्ली सरकार को दो शिविर आयोजित करने का निर्देश दिया. एक नरेला में फ्लैट्स के कब्जे पत्र सौंपने के लिए और दूसरा आवश्यक होने पर ऋण स्वीकृति के लिए.
मद्रासी कैंप जल प्रवाह को बाधित कर रहा है
इससे पहले अदालत ने कहा था कि सवाल यह है कि कॉलोनी जल प्रवाह में बाधा डाल रही है तो इसे हटना ही होगा. शहर में अनावश्यक ही पानी भर जा रहा है. दिल्ली में जो लोग रह रहे हैं और कर दे रहे हैं, वे नहीं चाहते हैं कि उनके घरों में पानी भर जाए, लेकिन हम सुनिश्चित करेंगे कि आपको वैकल्पिक जमीन पर ले जाया जाए. हम प्रशासन से पुनर्वास कराने को कहेंगे. पिछली सुनवाई में डीडीए की ओर से पेश वकील प्रभसहाय कौर ने कहा कि बारापुला नाले पर मद्रासी कैंप का स्थान जल प्रवाह को बाधित कर रहा है या नही.
कोर्ट ने आगे कहा था कि अगर मद्रासी कैंप जल प्रवाह को बाधित कर रहा है तो निश्चित रूप से इसे जाना चाहिए, क्योंकि शहर में अनावश्यक रूप से बाढ़ आ रही है. ऐसे में शहर को बार-बार बाढ़ की अनुमति नहीं दे सकते हैं. कोर्ट ने कहा था कि इस बस्ती से पुनर्वास के लिए एलिजिबल और इन- एलिजिबल झुग्गियों की पूरी लिस्ट रिकॉर्ड पर लाने और 214 झुग्गियों को हटाने पर ध्यान देने का डुसिब को निर्देश दिया था, जिनका हटना नाले के मुक्त बहाव के लिए जरूरी है.
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-भारत एक्सप्रेस
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