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13 साल पहले लापरवाही से गाड़ी चलाते हुए बाइक सवार की जान लेने के मामले में कोर्ट ने ट्रक ड्राइवर को सुनाई सजा

दरअसल यह मामला लापरवाही से गाड़ी चलाने की घटना से जुड़ा था. एक ट्रक ड्राइवर सुखदेव ने वर्ष 2012 में लापरवाही से गाड़ी चलाते हुए मोटरसाइकिल सवार की जान ले ली थी. जिस पर सभी पक्षों की जिरह के बाद अदालत ने ड्राइवर को दोषी ठहराया है.

Delhi High Court

सांकेतिक तस्वीर.

एक स्टेनोग्राफर की आत्महत्या की धमकी देने पर कड़कड़डूमा कोर्ट ने सड़क दुर्घटना के मामले में अपना फैसला नहीं सुनाया है. कड़कड़डूमा कोर्ट के न्यायिक मजिस्ट्रेट नेहा गर्ग ने अपने 29 अप्रैल के आदेश में कहा कि इस मामले में फैसला नहीं सुनाया जा सकता है, क्योंकि स्टेनोग्राफर ने अदालत को धमकी दी है कि वह आत्महत्या कर लेगा. यह कहते हुए वह अदालत से बाहर निकल गया था. जिसके बाद कोर्ट ने फैसला सुनाने के लिए 9 मई को सूचीबद्ध किया और उस दिन फैसला सुनाया.

अदालत में सुनवाई के दौरान गवाहों के बयान, सबूतों की समीक्षा और दलीलों के आधार पर अदालत ने दोषी ट्रक ड्राइवर सुखदेव को धारा 279 के तहत छह महीने का कठोर कारावास और पांच सौ रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है. जबकि धारा 304 A के तहत आरोपी को बाइक सवार की मौत का कारण मानते हुए दो साल की कारावास की सजा सुनाई है.

2012 का है मामला

दरअसल यह मामला लापरवाही से गाड़ी चलाने की घटना से जुड़ा था. एक ट्रक ड्राइवर सुखदेव ने वर्ष 2012 में लापरवाही से गाड़ी चलाते हुए मोटरसाइकिल सवार की जान ले ली थी. जिस पर सभी पक्षों की जिरह के बाद अदालत ने ड्राइवर को आईपीसी की धारा 279 (सार्वजनिक मार्ग पर लापरवाही से गाड़ी चलाना) और धारा 304 ए ( लापरवाही से मौत का कारण बनना) के तहत दोषी ठहराया है.

दोनों पक्षों की मौजूदगी में अदालत की कार्यवाही शुरू हुई थी. इसी बीच एक स्थायी स्टेनोग्राफर ने जज नेहा गर्ग को आत्महत्या की धमकी दी और कोर्ट रूम से बाहर चला गया. इसके बाद अदालत में बैठी जज को बेहद अनपेक्षित और चौंकाने वाले घटनाक्रम के चलते अपनी कार्यवाही बीच में रोकनी पड़ीं.


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-भारत एक्सप्रेस



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