दिल्ली हाईकोर्ट ने ‘मजनू का टीला’ इलाके में अवैध रूप से चल रहे रेस्टोरेंट्स, कैफे और व्यावसायिक दुकानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया है. कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को कानून के मुताबिक कार्रवाई करने के निर्देश दिया है. साथ ही कोर्ट ने यमुना किनारे बिना अनुमति के बने ढांचों को भी हटाने का निर्देश दिया है क्योंकि ये निर्माण यमुना संरक्षण नियमों और एमसीडी के बिल्डिंग सेफ्टी नियमों का खुला उल्लंघन है.
इस पर कोर्ट ने तीन महीने के भीतर कार्रवाई पूरी करने का निर्देश देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया है. कोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों की सुरक्षा पर चिंता जताई हैं. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय के लगभग आधे छात्र इस इलाके में जाते हैं.
नए साल की भीड़ को लेकर कोर्ट अलर्ट
कोर्ट ने सवाल उठाया कि पिछले 50-60 वर्षों से लोग वहां बसे हुए हैं और अवैध गतिविधियों चल रही हैं, लेकिन प्रशासन ने अब तक इस पर पर्याप्त संज्ञान क्यों नही लिया? मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कोर्ट से आग्रह किया कि साल के अंत में, खासकर नए साल के समय यहां भारी भीड़ जुटती है, जिससे किसी बड़े हादसे या भगदड़ की संभावना बनी रहती है.
सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि जिस जगह पर अवैध निर्माण और कैफे बने है यह जमीन डीडीए की है और इसको देखने के लिए पहले से ही स्पेशल टास्क फोर्स सक्रिय है.
उन्होंने यह भी बताया कि अवैध निर्माण को लेकर कोर्ट पहले ही आदेश दे चुका है, जिसका पालन किया जा रहा है. वही डीडीए ने भी बताया कि इसको लेकर एसटीएफ पोर्टल पर स्वतः संज्ञान लेते हुए एक शिकायत दर्ज कर ली गई है. शिकायत के बाद कानूनी प्रक्रिया चल रही है.
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-भारत एक्सप्रेस
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