दिल्ली हाईकोर्ट ने जम्मू और कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी को निर्देश दिया है कि वह अपनी मानहानि याचिका में सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री अपलोड करने वालों का नाम शामिल करें. कोर्ट 16 दिसंबर को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. जस्टिस अमित बंसल ने दायर याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया है. साथ ही कोर्ट ने 13 जनवरी से पहले मामले को सूचिबद्ध करने की मांग को भी स्वीकार कर लिया है.
पोस्ट हटाने की मांग
मामले की सुनवाई के दौरान उपमुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राजीव नैय्यर ने अदालत को बताया कि इंटरनेट पर प्रसारित वीडियो में उनके मुवक्किल के चेहरे को एक महिला के साथ जोड़ते हुए अशोभनीय ढंग से जोड़ा गया है. जिससे उनकी छवि को गंभीर क्षति पहुंची है. सुरिंदर कुमार चौधरी ने इन सामग्रियों को सोशल मीडिया से तत्काल हटाने की मांग की है.
चौधरी ने दायर याचिका में यह भी कहा है कि फेसबुक पेजों और यूटूयूब चैनलों सहित विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर उनके खिलाफ यौन संकेतों वाली आपत्तिजनक और मानहानिकारक सामग्री पोस्ट की गई है.
कोर्ट ने कहा सामने वाले को मिले मौका
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी सामग्री को हटाने का आदेश पारित करने से पहले जरूरी है कि जिन लोगों ने यह सामग्री अपलोड की उन्हें विधिवत पक्षकार बनाया जाए और उन्हें सुनवाई का अवसर दिया जाए.
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गुगल और मेटा को दिए गए थे निर्देश
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने गूगल और मेटा को निर्देश दिया था कि वे उन फेसबुक पेजों और यूट्यूब चैनलों का विवरण उपमुख्यमंत्री की लीगल टीम को उपलब्ध कराए, जो यह वीडियों प्रसारित कर रहे है. कोर्ट ने सोशल मीडिया पर वीडियों अपलोड करने वालों को भी पक्षकार बनाने का निर्देश दिया था.
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