सीमा सुरक्षा बल के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल रहे अश्विनी कुमार शर्मा को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है. दिल्ली हाई कोर्ट ने 42 फीसदी सुनने की क्षमता खोने वाले बीएसएफ अधिकारी को दिव्यांगता मुआवजा देने का आदेश दिया है. शर्मा को सीसीएस अधिनियम 1939 के नियम 9 (3) के तहत दिव्यांगता मुआवजा दिया जाए. कोर्ट ने आदेश में स्पष्ट किया कि मुआवजा 27 सितंबर 2017 आए प्रभावी होगा. कोर्ट 9 फीसदी व्याज के साथ मुआवजा देने को कहा है.
अधिकारियों की लापरवाही पर कोर्ट ने जताई नाराजगी
अश्विनी कुमार शर्मा को 2001 में जम्मू कश्मीर में एक आइईडी ब्लास्ट में 42 फीसदी सुनने की क्षमता का नुकसान हुआ था. जस्टिस सी. हरिशंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की पीठ ने कहा कि शर्मा जैसे जांबाज अधिकारी को अपने हक के लिए भीख मांगने जैसी स्थिति में नही डाला जा सकता था. कोर्ट ने साफ कहा है कि संबंधित अधिकारियों को खुद ही उनका मुआवजा जारी करना चाहिए था.
कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता से यह उम्मीद नहीं कि जा सकती कि बार-बार अधिकारियों से भीख मांगने जैसा व्यवहार करें. हमें नही समझ पाते कि 2001 में ड्यूटी के दौरान लगी चोट के बावजूद अधिकारी को 24 साल तक इंतजार करना पड़ा. कोर्ट ने अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जताई और कहा कि शर्मा युद्ध क्षेत्र में घायल हुए थे, फिर भी उन्हें हक से वंचित रखा गया.
बता दें कि 2001 में जम्मू कश्मीर में आइईडी ब्लास्ट के दौरान घायल हो गए थे, अश्विनी कुमार शर्मा 2018 में सेवानिवृत्त हो गए. उसके बाद 2022 में मुआवजे की मांग की जिसे अधिकारियों ने खारिज कर दिया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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