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दिल्ली पुलिस और परिवार को बिना जानकारी दिए राजस्थान पुलिस द्वारा गिरफ्तारी, दिल्ली हाई कोर्ट ने तलब की रिपोर्ट

दिल्ली हाई कोर्ट ने राजस्थान पुलिस द्वारा दिल्ली से दो नाबालिगों की गिरफ्तारी पर कड़ी टिप्पणी की है. अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को होगी.

दिल्ली पुलिस को बिना जानकारी दिए राजस्थान पुलिस द्वारा दिल्ली से दो नाबालिगों को की गई गिरफ्तारी का मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है. दिल्ली हाई कोर्ट ने इसको लेकर कड़ा रुख अख्तियार किया है. जस्टिस ज्योति सिंह और जस्टिस अनीश दयाल की पीठ के समक्ष पेश होकर अजमेर की एसपी वंदिता राणा ने कोर्ट को बताया कि संबंधित पुलिकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है. साथ ही इस बात की भी जांच चल रही है कि इसमें नियमों का पालन क्यों नही किया गया और चूक कहां हुई है.

मृतक देवा पारधी से जुड़ा मामला

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राजस्थान पुलिस को फटकार लगाते हुए पूछा था कि दिल्ली पुलिस और परिजनों को बिना सूचना दिए दोनों नाबालिगों को गिरफ्तार क्यों किया गया. कोर्ट ने कहा कि ये दोनों युवक देवा पारधी के रिश्तेदार बताए जा रहे है. देवा पारधी की पिछले साल मध्य प्रदेश पुलिस की हिरासत में मौत हो गई थी. कोर्ट ने राजस्थान सरकार को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई से पहले जांच रिपोर्ट और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की स्थिति रिपोर्ट देने को कहा है.

वही, दिल्ली पुलिस को गिरफ्तारी से जुड़ा सीसीटीवी फुटेज सीलबंद लिफाफे में कोर्ट में जमा करने को कहा है. कोर्ट 8 अक्टूबर को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. कोर्ट ने कहा कि यह मामला खास तौर पर अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी, अवैध हिरासत और प्रक्रियात्मक उल्लंघनों से जुड़ा है, इसलिए इसकी गहन जांच की जरूरत है. 26 अक्टूबर को जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने सीबीआई से 7 अक्टूबर तक गिरफ्तार करने को कहा है. कोर्ट मृतक की मां की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रहा है.

कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन

पिछली सुनवाई में सीबीआई की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया था कि मौत के जिम्मेदार दोनों पुलिस अधिकारियों को कल यानी 24 सितंबर को निलंबित कर दिया गया है. इसपर जस्टिस नागरत्ना ने पूछा था कि कल क्यों? आप कह रहे हैं कि वे अप्रैल से फरार है. इसका मतलब है कि आप उन्हें बचा रहे हैं. यही जस्टिस आर महादेवन ने कहा था कि वाकई यह अवमानना का मामला है.

कोर्ट ने मौत के जिम्मेदार दोनों पुलिस अधिकारियों को गिरफ्तार ना करने पर सीबीआई को फटकार लगाई थी. वही राजस्थान पुलिस का दावा है कि गिरफ्तार किए गए युवक नाबालिग नहीं हैं, लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चाहे जो भी स्थिति हो, स्थानीय पुलिस को जानकारी देना जरूरी था. बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट गिरफ्तार युवक की मां की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई कर रहा है.

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भारत एक्सप्रेस



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