Bharat Express DD Free Dish

चेक बाउंस को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नया दिशा निर्देश, अब आरोपी ऑनलाइन जमा कर सकता है पैसा

सुप्रीम कोर्ट ने चेक बाउंस मामलों के निपटारे के लिए नई दिशा निर्देश जारी की हैं. अब आरोपी ऑनलाइन भुगतान कर सकेगा और समन डिजिटल माध्यम से भेजा जाएगा.

Supreme Court

चेक बाउंस के लंबित मामलों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नई दिशा निर्देश जारी किया है. नई दिशा निर्देश के तहत अब आरोपी ऑनलाइन पैसा जमा कर सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने यह दिशा निर्देश निचली अदालतों के लिए तय किया है. कोर्ट द्वारा जारी सभी दिशा निर्देश 1 नवंबर से लागू होगा. जस्टिस मनमोहन और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा कि दिसंबर 2024 तक देश भर में ऐसे 43 लाख मामले थे. इनमें राजस्थान में सबसे ज्यादा 6.4 लाख चेक बाउंस के मामले है, जबकि महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बंगाल में निचली अदालतों में लंबित मामलों का 50 फीसदी केस चेक बाउंस के हैं.

ऑनलाइन भुगतान की सुविधा

कोर्ट ने कहा कि पिछले 15 वर्षों में कई बार इसको लेकर दिशा निर्देश जारी किया गया, लेकिन फिर भी बड़े शहरों की अदालतों में इन मामलों की संख्या बहुत ज्यादा है. 1 सितंबर को दिल्ली में धारा 138 के तहत 650283 मामले, मुंबई में 117190 और कोलकाता में 265985 मामले लंबित हैं. सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशानिर्देशों में मुख्य बातें है. समन की तामील अब डिजिटल माध्यम से होगी. ईमेल, व्हाट्सएप और मैसेजिंग एप के जरिए. शिकायतकर्ता को अभियुक्त का मोबाइल और ईमेल विवरण हलफनामे के साथ देना होगा. यदि चेक का राशि का भुगतान सेशन कोर्ट या हाई कोर्ट में पुनरीक्षण या अपील के लिए किया जाता है, तो ऐसी अदालतें इस शर्त पर अपराध का निपटारा कर सकती है कि अभियुक्त चेक राशि का 7.5 फीसदी खर्च के रूप में अदा करे. ऑनलाइन भुगतान की सुविधा हर जिला अदालत में क्यूआर कोड/यूपीआई लिंक के जरिए चेक राशि का तुरंत भुगतान किया जा सकेगा. यदि आरोपी राशि चुका देता है, तो मामला खत्म किया जा सकता है.

कोर्ट ने कहा कि व्यक्तिगत रूप से आरोपी को समन की कॉपी पहुचाएं. इसके बाद कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर इस बात की जानकारी दें. हर केस के साथ निर्धारित प्रारूप में पक्षकारों, चेक का विवरण, अनादर कारण, नोटिस और मांगी गई राहत का सारांश जोड़ा जाएगा. कोर्ट ने कहा कि अदालतें ऐसे मामलों को सामान्य सिविल केस की तरह लंबा खींचने के बजाए त्वरित सुनवाई निपटाए. यदि वह मुकदमे को समरी से समन ट्रायल में बदलें तो इसका कारण दर्ज करना होगा. सुप्रीम कोर्ट ने अपने दिशा निर्देश में यह भी कहा है कि अदालतें उपयुक्त मामलों में जल्द से जल्द अंतरिम राशि जमा कराने का आदेश दे सकती हैं. शुरुआती चरण में आरोपी से पूछा जाएगा कि क्या वह चेक स्वीकार करता है, क्या देयता मानता है या क्या समझौते को तैयार है.

मामलों के लिए निगरानी समिति गठित

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि समन की तामील के बाद सुनवाई कोर्ट में ही होनी चाहिए, केवल शुरुआती चरण में ही डिजिटल सुनवाई हो सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जोशाम की अदालतें चेक बाउंस केस सुनती हैं, उनके अधिकार क्षेत्र में आने वाली रकम को बढ़ाई जाए. कोर्ट ने कहा कि दिल्ली, मुंबई और कोलकाता की जिला अदालतों के लिए डैश बोर्ड बनें. इनमें चेक बाउंस मामलों की प्रगति के आंकड़े लगातार अपडेट हों और जिला जज तीन महीनों में रिपोर्ट हाई कोर्ट को भेजे. जारी दिशा निर्देश में यह भी कहा गया है कि दिल्ली, बॉम्बे और कलकत्ता हाई कोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश आंतरिक निगरानी कमेटी बनाएं, जो उनके अधिकार क्षेत्र में आने वाली जिला अदालतों में लंबित चेक बाउंस मामलों की निगरानी करें और त्वरित निपटारा सुनिश्चित करें.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि चेक बाउंस मामलों में मुख्य मकसद दंड देना नहीं, बल्कि बकाया राशि की अदायगी और चेक की विश्वसनीयता बनाए रखना है.

ये भी पढ़ें: GST में कटौती के बावजूद मात्रा बढ़ाकर पुराना दाम वसूलना ‘धोखा’: दिल्ली हाईकोर्ट

भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read