दिल्ली हाई कोर्ट से बॉलीवुड के मशहूर कॉमेडियन राजपाल यादव द्वारा दायर चेक बाउंस के मामले में सभी पक्षों की जिरह के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है. जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच ने सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के बीच विवाद को सुलझाने का प्रयास किया, लेकिन कोई समझौता नही हो पाया. भमले कि सुनवाई के दौरान राजपाल यादव ने कहा कि अदालत का जो भी फैसला होगा उसे वो स्वीकार करेंगे. कोर्ट ने राज्यपाल यादव की सजा पर निलंबन के आदेश को फैसला आने तक बरकरार रखा है.
पिछली सुनवाई में कहा था कि राजपाल यादव के फरार होने का कोई खतरा नही है. राजपाल यादव अब तक मुरली पप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को 4 करोड़ 25 लाख रुपए का भुगतान कर चुके है. इसपर अदालत ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा था कि चूंकि अभिनेता ने पर्याप्त धनराशि का भुगतान कर दिया है, इसलिए दोबारा जेल नही भेजा जा रहा है. कोर्ट ने राजपाल यादव को 18 मार्च तक के लिए अंतरिम जमानत दे दिया था. साथ ही पासपोर्ट सरेंडर करने का आदेश दिया था.
राजपाल यादव को पिछले दिनों चेक बाउंस से जुड़े मामले में दिल्ली हाई कोर्ट जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने सरेंडर करने का आदेश दिया था. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि अभिनेता के पेशे या फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े होने के आधार पर उन्हें कोई खास रियायत नहीं दी जा सकती. जिसके बाद राजपाल यादव ने भावुक भरा पोस्ट किया था, और कहा था कि उनके पास पैसा नही है, उनको जेल जाने के अलावा कोई और विकल्प नही है. उसके बाद से ही उनको मदद करने वाले कई लोग सामने आए और उनकी मदद की.
ब्याज सहित कुल बकाया बढ़कर 9 करोड़ रुपए तक पहुंचा
भारत एक्सप्रेस न्यूज चैनल के सीएमडी उपेंद्र राय ने भी राजपाल यादव को 25 लाख रुपए की अनुग्रह राशि देकर उन्हें आर्थिक मदद की. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि याचिकाकर्ता राजपाल यादव का आचरण निंदनीय है. बार-बार आश्वासन देने और अदालत से रियायत मांगने के बावजूद उन्होंने समय-समय पर पारित आदेशों का पालन नहीं किया. राजपाल यादव पर 9 करोड़ रुपए का बकाया है.
यह मामला 2010 का है, जब राजपाल यादव ने अपनी पहली निर्देशित फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से करीब 5 करोड़ रुपए का लोन लिया था, जो ब्याज सहित फिलहाल 9 करोड़ हो चुका है.
-भारत एक्सप्रेस
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