1993 इंडियन एयरलाइंस हाईजैकिंग मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हरि सिंह को दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) से बड़ी राहत मिल गई है. जस्टिस संजीव नरूला की बेंच ने सजा समीक्षा बोर्ड (एसआरबी) के उस फैसले को खारिज कर दिया है, जिसमें हरि सिंह की समयपूर्व रिहाई की मांग वाली याचिका को अस्वीकार कर दिया गया था. जस्टिस नरूला ने नए सिरे से विचार के लिए सजा समीक्षा बोर्ड को भेज दिया है.
जेल में कैदी का आचरण सुधार की ओर इशारा कर रहा है- कोर्ट (Delhi High Court)
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जेल में कैदी का आचरण सुधार की ओर इशारा कर रहा है. कोर्ट ने एसआरबी को हरि सिंह की समयपूर्व रिहाई की मांग को लेकर दायर याचिका पर 8 सप्ताह में विचार करने का निर्देश दिया है. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया जाता एसआरबी ने केवल अपराध की गंभीरता के आधार पर याचिका को खारिज किया, जो कि प्रशासनिक आदेश के लिए जरूरी तर्कसंगत कारणों के मानकों पर खरी नहीं उतरती.
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हरि सिंह की ओर से पेश वकील ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान हरि सिंह की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि 12 मई तक हरि सिंह 17 साल 11 महीने 6 दिन और 22 साल 6 महीने और 20 दिन की कुल (रिमिशन समेत) सजा को पूरी कर ली थी. इसपर टिप्पणी करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि लगभग 18 साल की वास्तविक कैद के दौरान कैदी के खिलाफ जेल में किसी भी तरह की अनुशासनहीनता की रिपोर्ट नही है, जिससे यह संकेत मिलता हो कि वह अब भी आपराधिक मानसिकता नहीं रखता.
हरि सिंह काट रहे आजीवन कारावास की सजा
हरि सिंह एक ट्रक ड्राइवर था, वह देशभर में हो रहे साम्प्रदायिक हिंसा से परेशान होकर यह कदम उठाया था. गौरतलब है कि हरि सिंह को निचली अदालत ने 2001 में 1982 के एंटी-हाईजैकिंग एक्ट की धारा 4 और आईपीसी की धारा 353, 365 और 506 (ll) के तहत दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. जिसके बाद यह मामला हाई कोर्ट पहुचा और हाई कोर्ट ने 2011 में हरि सिंह की अपील को खारिज कर दिया. उसके बाद हरि सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लिव पिटीशन याचिका दायर की, जिसे बाद में उसने वापस ले लिया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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