दिल्ली हाई कोर्ट से संजय कपूर की वसीयत की फॉरेंसिक निरीक्षण की अनुमति मिल गई है. वसीयत की कॉपी दिल्ली हाई कोर्ट के रजिस्ट्री के पास सीलबंद लिफाफे में रखी हुई है. हाई कोर्ट के संयुक्त रजिस्ट्रार गगनदीप जिंदल ने कहा कि करिश्मा और रानी कपूर या उनके फॉरेंसिक और हस्तलेख विशेषज्ञ 10 मार्च को वसीयत का निरीक्षण कर सकते है.
वही हाई कोर्ट ने प्रिया कपूर की आपत्ति को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि 10 मार्च को फॉरेंसिक या हस्तलेख विशेषज्ञ वसीयत की जांच कर सकते है. प्रिया कपूर ने कहा था कि रानी कपूर ने पारिवारिक ट्रस्ट के खिलाफ जो मुकदमा किया है, वह गलत जानकारी पर आधारित है. उन्होंने कोर्ट से मांग की है कि रानी कपूर पर झूठी गवाही देने के मामले में कार्रवाई की जाए. रानी कपूर परिवार की मुखिया है. उनके परिवार में उनकी दो बेटियां है. उनके दिवंगत पुत्र स्वर्गीय संजय कपूर तथा उनके बच्चे यानी वादी की पोते-पोतियां शामिल है.
प्रिया सचदेवा कपूर पर वसीयत में हेराफेरी करने का आरोप
याचिकाकर्ता के अनुसार रानी कपूर स्वर्गीय डॉक्टर सुरिंदर कपूर की पूरी संपत्ति की एक मात्र लाभार्थी और उत्तराधिकारी है. डॉक्टर सुरिंदर कपूर विभिन्न व्यवसायों के प्रमुख थे, जिनमें सोना ग्रुप ऑफ कंपनियां शामिल हैं. सुरिंदर कपूर का 6 फरवरी 2015 को निधन हो गया था. बता दें कि करिश्मा कपूर के बच्चों समायरा और कियान ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक दीवानी मुकदमा दायर किया, जिसमें आरोप लगाया गया कि उनकी सौतेली मां प्रिया सचदेवा कपूर ने उनके पिता की वसीयत में गड़बड़ी करने की कोशिश की थी.
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