दिल्ली हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के तहत भूमि के गलत कब्जे या बेदखली से जुड़ी धाराओं के इस्तेमाल किसी बैंक को उसके वैध मॉर्गेज अधिकारों के इस्तेमाल से नही रोका जा सकता है. जस्टिस सचिन दत्ता ने यह आदेश दिया है. कोर्ट ने एक्सिस बैंक, उसके मैनेजिंग डायरेक्टर और मुख्य कार्यकारी अधिकारी के खिलाफ राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग द्वारा शुरू की गई कार्यवाही पर रोक लगा दिया है.
ST आयोग की कार्रवाई पर सवाल
कोर्ट 5 फरवरी 2026 को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि पहली नजर में अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(1(f) लागू नहीं होता है क्योंकि याचिकाकर्ता ने मॉर्गेज अधिकार या सुरक्षा हित के इस्तेमाल को रोकने के लिए लागू नही किया जा सकता है. हाई कोर्ट ने ने कहा कि आयोग द्वारा की जा रही कार्यवाही उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है. कोर्ट ने कहा कि आयोग द्वारा बिना कोई कारण बताए एक्सिस बैंक के एमडी और सीईओ को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश देना सही नही है.
कोर्ट ने दी अगली सुनवाई की तारीख
यह मामला वर्ष 2013 का है. जिसमें एक्सिस बैंक द्वारा सुंदेव अप्लायंसेज लिमिटेड को 16.69 करोड़ का कर्ज देने से जुड़ा है. इसके लिए महाराष्ट्र के वसई स्थित एक संपत्ति को गिरवी रखा गया था. बाद में यह मामला कानूनी पचड़े में पड़ गया और संबंधित व्यक्ति ने मामले को राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वयोग से शिकायत की, जिस शिकायत में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति एक्ट के विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की, जिसकी शिकायत पर आयोग ने बैंक सहित अधिकारियों को तलब किया था, जिसपर हाई कोर्ट ने रोक लगा दिया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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