दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (DSGMC) की चुनाव प्रक्रिया में सुधार के लिए की जा रही निष्क्रियता पर गंभीर चिंता जताई है. कोर्ट ने गुरुद्वारा चुनाव निदेशालय, उपराज्यपाल और अन्य प्रतिवादियों से इस मुद्दे पर जवाब मांगा है. यह याचिका गुरमीत सिंह शंटी और परमजीत सिंह खुराना द्वारा दायर की गई थी. याचिका में दिल्ली सिख गुरुद्वारा अधिनियम, 1971 के तहत चुनाव प्रणाली में जरूरी सुधारों को लागू करने में विफलता की ओर इशारा किया गया है.
दिल्ली हाई कोर्ट ने जस्टिस ज्योति सिंह की अध्यक्षता में यह सुनवाई की, जिसमें याचिकाकर्ता के वकील राजेंद्र छाबड़ा ने अपनी दलीलें पेश कीं. कोर्ट ने प्रतिवादियों से शिकायतों का समाधान करने के लिए एक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया. अगली सुनवाई 25 फरवरी को होगी.
याचिका में यह भी कहा गया कि डीएसजीएमसी चुनावों में 1983 की पुरानी और गलत मतदाता सूचियों का उपयोग जारी है, जो 43 साल से अधिक पुरानी हैं. याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से आग्रह किया कि इन पुरानी सूचियों को जल्द हटाया जाए और नई फोटोयुक्त, अद्यतन सूचियाँ तैयार की जाएं. साथ ही, चुनाव क्षेत्र के परिसीमन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की भी अपील की गई है.
अगस्त 2025 में होने वाले डीएसजीएमसी चुनावों को देखते हुए याचिकाकर्ताओं ने समयसीमा तय करने की मांग की है, ताकि सिख समुदाय के अधिकारों का संरक्षण हो सके और किसी भी प्रकार की देरी से बचा जा सके.
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