दिल्ली के न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को बैठक से संबंधित जानकारी हलफनामे के जरिए दाखिल करने का निर्देश दिया है. कोर्ट 7 जुलाई को मामले में अगली सुनवाई करेगा. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया है कि विधि विभाग ने स्थिति रिपोर्ट दाखिल कर दी है.
कोर्ट की दिल्ली पुलिस को फटकार
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा था कि आप न्यायपालिका की स्वतंत्रता से समझौता कर रहे हैं. कोर्ट ने कहा था कि अब अगर हम उन्हें कोर्ट के स्टाफ मुहैया करा सकते हैं, तो हम उन्हें पीएसओ भी मुहैया करा सकते हैं. कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली जैसे शहर में जहां अपराध दर बेहद अधिक है, वहां ऐसा करने में क्या बाधा है? ऐसी उदासीनता क्यों?
संयुक्त बैठक और सुरक्षा के लिए नोटिस
इससे पहले हाई कोर्ट ने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. जस्टिस मनोज जैन की बेंच ने केंद्रीय गृह मंत्रालय, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस से एक सप्ताह के भीतर संयुक्त बैठक करने को कहा था. बैठक में न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ठोस निर्णय लेने को कहा था.
ज्यूडीशियल सर्विसेज एसोसिएशन की याचिका
यह याचिका ज्यूडीशियल सर्विसेज एसोसिएशन ने दायर की है. दायर याचिका में मांग की गई है कि जिला न्यायपालिका में कार्यरत जजों को व्यक्तिगत सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, साथ ही उनके घरों पर भी उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए.
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि याचिका में उठाई गई चिंता बेहद गंभीर है और इसे किसी भी तरह कम करके नहीं आंका जा सकता है. जस्टिस मनोज जैन ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा था कि याचिका में उठाई गई चिंता गंभीर है और इन्हें किसी भी तरह हल्के में नहीं लिया जा सकता है. उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा था कि जजों की सुरक्षा के लिए ठोस व्यवस्था करना आवश्यक है.
जजों को धमकियों और रोड रेज का सामना
दायर याचिका में कहा गया है कि जज अपने न्यायिक कर्तव्यों के दौरान कई बार धमकियों, दुर्व्यवहार और अन्य जोखिमों का सामना करते हैं. याचिका में यह भी कहा गया है कि अगर न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित नहीं किया गया, तो यह न्याय व्यवस्था की गरिमा और विश्वास पर असर पड़ सकता है.
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याचिका में यह भी कहा गया है कि दिल्ली के अधिकांश न्यायिक अधिकारी खुद ही अपनी गाड़ी चलाकर अदालत आते-जाते हैं. इस दौरान कई बार उन्हें रास्ते में रोकने, पीछा करने और रोड रेज जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ता है, जो उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा करता है. यह भी कहा गया है कि कई बार न्यायिक अधिकारियों को गैंगवार से जुड़े कई आपराधिक मामलों को देखना पड़ता है.
कानून विशेषज्ञों की राय
इसको लेकर पंजाब सरकार के पूर्व एडिशनल सॉलिसिटर जनरल आर के कपूर ने कहा कि जजों की सुरक्षा जरूरी है. क्योंकि सिविल जज हो या क्रिमिनल जज हो, दोनों केस में गंभीर मामलों की सुनवाई करते हैं. इसलिए उनको खतरा बना रहता है. जबकि सुप्रीम कोर्ट के वकील सत्यम सिंह राजपूत की मानें तो जब जज को सुरक्षा मौजूद रहेगी तो वो निडर होकर न्याय कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों में जज को धमकियां मिल चुकी हैं. उनकी हत्याएं तक हो चुकी हैं. इसलिए सुरक्षा जरूरी है.
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