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लुटियंस की हरियाली पर दिल्ली हाई कोर्ट गंभीर; बेदखली नोटिस के खिलाफ इंडियन पोलो एसोसिएशन की याचिका पर 9 जुलाई को अगली जंग

दिल्ली हाई कोर्ट रेसकोर्स स्थित जयपुर पोलो ग्राउंड को केंद्र द्वारा कब्जे में लेने और बेदखली नोटिस के खिलाफ दायर इंडियन पोलो एसोसिएशन की याचिका पर 9 जुलाई को सुनवाई करेगा. कोर्ट ने बिना आदेश की कॉपी के याचिका दायर करने पर सवाल उठाए हैं, जबकि केंद्र ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला बताया है.

Delhi high court

दिल्ली हाई कोर्ट दिल्ली के प्रसिद्ध जयपुर पोलो ग्राउंड के मामले में दायर याचिका पर आगामी 9 जुलाई को सुनवाई करेगा. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि बिना आदेश की कॉपी के पटियाला हाउस कोर्ट के फैसले को कैसे चुनौती दी जा सकती है? हाई कोर्ट ने यह सवाल तब किया जब याचिकाकर्ता के वरिष्ठ वकील ने कहा कि उनके पास फिलहाल उस आदेश की कॉपी नहीं है, जिसके तहत निचली अदालत ने केंद्र के बेदखली नोटिस के खिलाफ उनकी याचिका खारिज कर दी थी.

राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है मामला

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के वकील आशीष दीक्षित ने कहा कि हमें नहीं पता कि आदेश सुनाया गया है या नहीं. उन्होंने कहा कि अवकाशकालीन बेंच (वेकेशन बेंच) महज एक घंटे के लिए बैठी थी, और अब नियमित कोर्ट फिर से खुल गए हैं.

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस विनोद कुमार ने केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील से पूछा था, “क्या आप वहां खुदाई कर रहे हैं? क्या आप खुदाई जारी रखना चाहते हैं?” इस पर केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि यह मामला सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है, क्योंकि पोलो ग्राउंड के ठीक पास भारतीय वायुसेना (IAF) का एक बेहद महत्वपूर्ण स्टेशन स्थित है. सरकार ने स्पष्ट किया कि फिलहाल केवल सीमा (बाउंड्री) का सीमांकन (Demarcation) किया जा रहा है और मैदान की घास या खेल की सतह से कोई छेड़छाड़ नहीं की जा रही है.

पटियाला हाउस कोर्ट से झटका

इससे पहले, पटियाला हाउस कोर्ट द्वारा बेदखली के नोटिस पर रोक लगाने से इनकार करने के बाद केंद्र सरकार ने दिल्ली के रेसकोर्स इलाके में स्थित जयपुर पोलो ग्राउंड को अपने कब्जे में ले लिया है. इंडियन पोलो एसोसिएशन ने कब्जा वापस पाने और केंद्र सरकार के 20 मई के बेदखली नोटिस पर रोक लगाने की मांग को लेकर पटियाला हाउस कोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन वहां से रोक नहीं लगाई गई; जिसके बाद यह मामला हाई कोर्ट पहुंचा था.

हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी

पिछली सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने दिल्ली के पर्यावरण पर चिंता जताते हुए बेहद सख्त टिप्पणी की थी. कोर्ट ने कहा था कि एनडीएमसी (NDMC) इलाके में जो थोड़ी-बहुत हरियाली बची है, अगर उसे भी खत्म कर दिया गया तो “दिल्ली का दम घुट जाएगा और हम सब घुट-घुट कर मरेंगे.” इसके साथ ही हाई कोर्ट ने निचली अदालत को इस मामले पर जल्द सुनवाई करने को कहा था.

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लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस का नोटिस

लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) द्वारा जारी नोटिस में साफ कहा गया है कि यह परिसर पूरी तरह से सरकारी स्वामित्व वाली भूमि है. केंद्र सरकार द्वारा परिसर पर चस्पा किए गए नोटिस में यह चेतावनी भी दी गई है कि अगर कोई भी व्यक्ति या संस्था यहाँ अवैध कब्जा, अतिक्रमण, निर्माण गतिविधि या अन्य किसी भी प्रकार का गैर-कानूनी उपयोग करने का प्रयास करती है, तो उसके खिलाफ कानून के दायरे में सख्त नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.



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