दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत (Patiala House Court) ने प्रतिबंधित संगठन ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया’ (PFI) के पूर्व प्रमुख सदस्य ई. अबूबकर की ओर से दायर नियमित जमानत याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया है. विशेष अदालत ने अबूबकर द्वारा कानूनी राहत के लिए दायर की गई इस तीसरी लगातार जमानत याचिका को ठुकराया है. यह फैसला ऐसे समय में आया है जब हाल ही में विशेष अदालत ने ई. अबूबकर समेत पीएफआई (PFI) के कई शीर्ष नेताओं और सक्रिय सदस्यों के खिलाफ आतंकी साजिश रचने, टेरर फंडिंग (आतंकवादी वित्तपोषण) करने और देश के खिलाफ जंग छेड़ने की एक बड़ी आपराधिक साजिश के तहत आधिकारिक रूप से कानूनी आरोप तय (चार्जेस फ्रेम) कर दिए थे.
ई. अबूबकर को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने सितंबर 2022 में पीएफआई के खिलाफ देश भर में चलाए गए एक बड़े पैमाने के तलाशी और धरपकड़ अभियान के दौरान गिरफ्तार किया था. जांच एजेंसी एनआईए के पुख्ता दावों के मुताबिक, PFI, उसके सक्रिय सदस्यों और पदाधिकारियों ने भारत भर में बड़े पैमाने पर आतंकी वारदातों को अंजाम देने और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए अवैध धन जुटाने की एक गहरी आपराधिक साजिश रची थी. इस राष्ट्रविरोधी मकसद को पूरा करने के लिए वे अपने कैडर्स (कार्यकर्ताओं) को हथियारों और हिंसा का प्रशिक्षण देने के लिए गुप्त प्रशिक्षण शिविर (ट्रेनिंग कैंप्स) भी आयोजित कर रहे थे.
AIIMS में चल रहा है इलाज
सुनवाई के दौरान आरोपी ई. अबूबकर के वकीलों ने कोर्ट में तर्क दिया था कि गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) की सख्त धाराओं के तहत उनके खिलाफ एनआईए के मामले का समर्थन करने के लिए रिकॉर्ड पर कोई भी पर्याप्त या प्रत्यक्ष सामग्री मौजूद नहीं है.
उन्होंने मानवीय और चिकित्सीय आधार पर कोर्ट को बताया था कि अबूबकर की आयु वर्तमान में 70 वर्ष हो चुकी है और वे वर्तमान में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से पीड़ित हैं. इसके साथ ही वे पार्किंसंस रोग (Parkinson’s disease) से भी गंभीर रूप से जूझ रहे हैं. वकीलों ने दलील दी कि अपनी न्यायिक हिरासत के दौरान उनकी बिगड़ती मेडिकल स्थिति के चलते उन्हें कई बार इलाज के लिए तिहाड़ जेल से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), दिल्ली ले जाना पड़ा है.
कैडर्स को दे रहे थे हथियारों की ट्रेनिंग’
दूसरी ओर, केंद्रीय जांच एजेंसी एनआईए (NIA) ने अबूबकर की जमानत याचिका का अदालत में पुरजोर विरोध किया. एनआईए के अभियोजन पक्ष ने कहा कि जांच के दौरान ऐसे पर्याप्त डिजिटल और भौतिक साक्ष्य मिले हैं जो यह साबित करते हैं कि देश में अवैध और हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए युवाओं और कैडर्स को प्रशिक्षित करने के वास्ते इन आरोपियों द्वारा कैंप आयोजित किए जा रहे थे.
जांच एजेंसी ने कोर्ट को सचेत करते हुए कहा कि अबूबकर के खिलाफ पूर्व से ही कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं और वह एक बेहद प्रभावशाली व्यक्ति है; यदि इस चरण में उसे जेल से रिहा किया जाता है, तो कोई भी गवाह डर के मारे उसके खिलाफ अदालत में गवाही देने का साहस नहीं जुटा पाएगा.
केरल से लेकर राजस्थान तक फैले थे तार
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2022 में, केंद्र सरकार द्वारा इस संगठन और इसके सभी सहयोगी विंग्स पर राष्ट्रव्यापी पूर्ण प्रतिबंध लगाने से ठीक पहले एक सुनियोजित कार्रवाई की गई थी. इस दौरान देश के कई राज्यों में PFI के कई कथित शीर्ष कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया या गिरफ्तार किया गया था. एनआईए ने देश विरोधी और आतंकी गतिविधियों को कथित समर्थन देने के गंभीर आरोपों में 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एक साथ छापेमारी कर PFI कार्यकर्ताओं को दबोचा था.
इसी कड़ी में ई. अबूबकर को 22 सितंबर 2022 को गिरफ्तार किया गया था. एनआईए और सुरक्षा एजेंसियों के ये व्यापक छापे मुख्य रूप से केरल, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, असम, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, दिल्ली और राजस्थान में एक साथ मारे गए थे.
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इससे पहले फरवरी महीने में, दिल्ली हाई कोर्ट ने तिहाड़ जेल के चिकित्सा अधीक्षक (मेडिकल सुपरिटेंडेंट) को एक सख्त निर्देश जारी किया था कि वे जेल परिसर के भीतर ही अबूबकर की इन गंभीर बीमारियों का नियमित, समयबद्ध और प्रभावी इलाज सुनिश्चित करें. हाई कोर्ट का यह निर्देश आरोपी की उस याचिका को खारिज करते हुए आया था, जिसमें उसने अपनी गंभीर बीमारियों का हवाला देकर जेल के बजाय अपने घर में ‘नजरबंद’ (हाउस अरेस्ट) रखने की गुहार लगाई थी.
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