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सुप्रीम कोर्ट से वक्फ बोर्ड संशोधन कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर जल्द सुनवाई की मांग

वहीं कांग्रेस के सांसद मोहम्मद जावेद ने याचिका दायर कर वक्फ संशोधन विधेयक को मुस्लिम समुदाय के प्रति भेदभावपूर्ण और उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने वाला बताते हुए चुनौती दी है.

Waqf Amendment Bill
Edited by Akansha

वक्फ बोर्ड संशोधन कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर जल्द सुनवाई की मांग को लेकर सीजेआई संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली बेंच क समक्ष याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और वरिष्ठ वकीप अभिषेक मनु सिंघवी ने मेंशनिंग की गई और जल्द सुनवाई की मांग की गई. जिसपर सीजेआई संजीव खन्ना ने कहा कि 2 बजे के बाद जल्द सुनवाई की मांग पर देखते हैं. उसके बाद सूचीबद्ध करूँगा.

वक्फ बिल को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मिली मंजूरी

संसद से बजट सत्र में पास वक्फ (संशोधन) बिल, 2025 को शनिवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिल गई. गजट नोटिफिकेशन जारी होने के साथ ही वक्फ अधिनियम 1995 का नाम भी बदलकर यूनिफाइड वक्फ मैनेजमेंट, इम्पावरमेंट, एफिशियंसी एंड डेवलपमेंट (उम्मीद) अधिनियम 2025 हो गया है. अमानतुल्लाह खान ने अनुच्छेद 32 के तहत यह याचिका दायर की है, जिसमें हालही में लोकसभा और राज्यसभा से पास वक्फ संशोधित बिल के कानूनी वैधता को चुनौती देते हुए इसे असंवैधानिक करार देने की मांग की गई है.

ये बिल मुस्लिम समुदाय के अधिकारों के खिलाफ

याचिका में कहा गया है कि ये बिल मुस्लिम समुदाय के धार्मिक, संस्कृति और संपत्ति के अधिकारों के खिलाफ है. वक्फ बोर्ड को केंद्र सरकार के अधीन लाकर अल्पसंख्यक समुदाय के स्वायत्तता को कमजोर की गई है. याचिका में यह भी कहा गया है कि ट्रिब्यूनल के न्यायिक शक्तियों को जिला कलेक्टर को सौंपना गलत है. जबकि असदुद्दीन ओवैसी ने अपनी याचिका में विधेयक की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है. संसद में भी ओवैसी ने वक्फ बिल का विरोध किया था और प्रतीकात्मक तौर पर इसकी एक कॉपी भी फाड़ दी थी.

कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने दायर की याचिका

वहीं कांग्रेस के सांसद मोहम्मद जावेद ने याचिका दायर कर वक्फ संशोधन विधेयक को मुस्लिम समुदाय के प्रति भेदभावपूर्ण और उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने वाला बताते हुए चुनौती दी है. उन्होंने अपनी याचिका में कहा गया है कि यह कानून संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 24 (धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता), अनुच्छेद 26 (धार्मिक मामलों के प्रबंधन की स्वतंत्रता), अनुच्छेद 29 (अल्पसंख्यक अधिकार) और अनुच्छेद 300 ए (संपत्ति का अधिकार) का उल्लंघन करता है.

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याचिका में कही गई ये बात

याचिका में यह भी कहा गया है कि जब हिंदू और सिख ट्रस्टों को स्व- नियमन की छूट प्राप्त है, तो केवल वक्फ संपत्तियों के मामलों में सरकारी हस्तक्षेप बढ़ाना असमान और अनुचित है. जावेद ने इस संशोधन के उस प्रावधान पर भी आपत्ति जाहिर की है, जिसमें कहा गया है कि वक्फ संपत्ति केवल उसी व्यक्ति द्वारा दी जा सकती है, जो कम से कम पांच वर्षों से इस्लामिक प्रैक्टिस कर रहा हो. यह प्रावधान उन लोगों के साथ भेदभाव करता है, जिन्होंने हाल ही में इस्लाम अपनाया है और अपनी संपत्ति वक्फ को देना चाहते हैं.

रिटार्यड जस्टिस ने वक्फ बोर्ड को लेकर कही ये बात

इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटार्यड जस्टिस ए. एन मित्तल ने वक्फ बोर्ड को लेकर कहा कि ये सभी याचिकाएं प्री मैच्योर है. क्योंकि राष्ट्रपति का उस बिल पर हस्ताक्षर नही हुआ है और ना ही वह विधेयक गजट में प्रकाशित हुआ है. इस अधिनियम में ऐसा कोई बिंदु नही है, जिसमें अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता हो. वक्फ का मैनेजमेंट एक जमीन का मैनेजमेंट है, एक संपत्ति का मैनेजमेंट है. तो संपत्ति के मैनेजमेंट को धर्म से जोर कर देखना सही नहीं. वहीं उत्तराखंड हाई कोर्ट से रिटायर्ड जस्टिस लोकपाल सिंह ने कहा कि इनका भी मानना है कि अभी तक वक्फ बोर्ड अधिनियम को लेकर जो भी याचिका दायर की गई है वह प्री मैच्योर है. इस बिल से मुस्लिम समाज के प्रत्येक वर्ग को उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा.

-भारत एक्सप्रेस 


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