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‘खुद ICU में भर्ती हुई ताकि पुलिस से बच सके’, धौला कुंआ हादसे में गगनप्रीत पर जांच भटकाने का आरोप; चार्जशीट पेश

दिल्ली के धौला कुंआ बीएमडब्ल्यू हादसे में आरोपी गगनप्रीत कौर कोर्ट में पेश हुईं. चार्जशीट में आरोप है कि हादसे के बाद घायल नवजोत सिंह को जानबूझकर समय पर मेडिकल मदद नहीं दी गई.

UAPA Case

दिल्ली के धौला कुंआ में हुए बीएमडब्ल्यू हादसा मामले में कथित आरोपी गगनप्रीत कौर पटियाला हाउस कोर्ट में पेश हुए. कोर्ट ने आरोपी को चार्जशीट की कॉपी देने का निर्देश दिया है. न्यायिक मजिस्ट्रेट अंकित गर्ग की कोर्ट 20 फरवरी को सुनवाई करेगा. उसी दिन डॉक्युमेंट्स की.स्क्रूटनी की जाएगी.

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने गगनप्रीत को समन जारी कर पेश होने का आदेश दिया था. 400 पेज के दाखिल चार्जशीट में कई खुलासा हुआ है. इस हादसे में वित्त मंत्रालय के डिप्टी सेक्रेटरी नवजोत सिंह (52) की मौत हो गई थी.

जानबूझकर मेडिकल मदद में देरी का आरोप

दायर चार्जशीट में पुलिस ने दावा किया है कि हादसे के बाद नवजोत कम से कम 15 मिनट तक जिंदा रहे और अगर समय पर मेडिकल मदद मिली होती तो उनकी जान बच जाती. चार्जशीट में यह भी आरोप लगाया गया है कि आरोपी गगनप्रीत मक्कड़ ने पीड़ित को समय रहते जरूरी चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में जानबूझकर देरी की. जिसके कारण वित्त मंत्रालय के अधिकारी नवजोत सिंह की मौत हो गई. चार्जशीट में गगनप्रीत के खिलाफ बीएनएस की धारा 105, बीएनएस की धारा 281/ 125बी और बीएनएस कि धारा 238 ए के तहत अपराधों से जोड़ा गया है.

यह दुर्घटना 14 सितंबर को करीब डेढ़ बजे हुई, जब गगनप्रीत की बीएमडब्ल्यू एक्स-5 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी. कार रिंग रोड़ पर दिल्ली कैंटोनमेंट मेट्रो स्टेशन के पास एक मेट्रो पिलर से टकरा गई और फिर हरि नगर निवासी नवजोत सिंह की मोटरसाइकिल से जा टकराई.

चार्जशीट में बड़ा आरोप

चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि हादसे के तुरंत बाद एक एम्बुलेंस पैरामेडिकल स्टाफ के साथ मौके पर पहुच गई थी, लेकिन गगनप्रीत ने उनकी मदद लेने से साफ इंकार कर दिया. इतना ही नही खुद को कानूनी लड़ाई से बचने के लिए आरोपी महिला ने मामूली चोट होने के बावजूद खुद को उसी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती करवा लिया, ताकि पुलिस पूछताछ से बच सके. पुलिस का कहना है कि यह सब जांचकर्ताओं को गुमराह करने के लिए किया गया था. गगनप्रीत फिलहाल जमानत पर है. जमानत पर सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने सवाल उठाते हुए कहा था एफआईआर 10 घंटे की देरी से दर्ज की गई है. उन्होंने यह भी कहा था कि घटना के लिए 1:38-1:39 बजे पीसीआर कॉल की गई थी. आरोपी का कथित इरादा गलत समझा गया है. वह डॉक्टर नहीं है और उसे यह पता नहीं था कि मरीज को कितना समय बचा है? यह हत्या के अपराध का मामला नहीं है.

वही स्पेशल पब्लिक प्रॉस्क्यूटर ने जमानत का विरोध करते हुए कहा था कि आरोपी की मंशा घायल को बचाने की नहीं, बल्कि खुद की कानूनी कार्यवाही से बचने की थी. दिल्ली के धौला कुंआ इलाके में 14 सितंबर 2025 को हुए सड़क हादसे में भारत सरकार के वित्त मंत्रालय में डिप्टी सेक्रेटरी नवजोत सिंह की मौत हो गई थी, जबकि उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गई.

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-भारत एक्सप्रेस



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