Bharat Express DD Free Dish
Pension Mission Shakti Digital
Pension Mission Shakti Digital

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्री से जुड़े मामले में डीयू को बड़ी राहत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मोदी की शैक्षणिक डिग्री से जुड़े मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने सीआईसी के उस आदेश को खारिज कर दिया है. जिसमें प्रधानमंत्री की बीए की डिग्री को दिल्ली विश्वविद्यालय को दिखाने का आदेश दिया था.

pm modi degree case
Edited by Vaibhav Gupta

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मोदी की शैक्षणिक डिग्री से जुड़े मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने सीआईसी के उस आदेश को खारिज कर दिया है. जिसमें प्रधानमंत्री की बीए की डिग्री को दिल्ली विश्वविद्यालय को दिखाने का आदेश दिया था.

कोर्ट के इस आदेश के बाद अब दिल्ली विश्वविद्यालय को आरटीआई एक्टिविस्ट नीरज कुमार को नही दिखानी होगी. जस्टिस सचिन दत्ता ने यह आदेश दिया है.

जिज्ञासा शांति के लिए दूसरे की जानकारी नही मांग सकते

कोर्ट ने 27 फरवरी को इस मामले में सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने ने कहा था कि अपनी जिज्ञासा शांति के लिए कोई सूचना के अधिकार के तहत किसी दूसरे का निजी जानकारी को नही मांग सकता है.

डीयू ने यह याचिका 2017 में दाखिल किया था. जिसमें केंद्रीय सूचना आयोग के एक आदेश को चुनौती दी गई है. उसमें दिल्ली विश्वविद्यालय से वर्ष 1978 में बीए प्रोग्राम पास करने वाले छात्रों के रिकॉर्ड के निरीक्षण की अनुमति देने का निर्देश दिया था. पीएम नरेंद्र मोदी ने भी उस समय परीक्षा पास की थी. वर्ष 2017 में 24 जनवरी को पहली सुनवाई में ही कोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयोग के आदेश पर रोक लगा दिया था.

आरटीआई का सहारा नही लिया जा सकता

एसजी मेहता ने कहा था कि यहां एक ऐसा मामला है, जिसमें एक अजनबी दिल्ली विश्वविद्यालय के आरटीआई कार्यालय में आता है और कहता है कि 10 लाख छात्रों में से मुझे एक्स की डिग्री दे दो. सवाल यह है कि क्या कोई अंदर आकर दूसरों की डिग्री मांग सकता है. जिज्ञासा के आधार पर किसी व्यक्ति को निजी जानकारी लेने का अधिकार नहीं है. इसके लिए वह आरटीआई के सहारा नही ले सकता है. इस तरह का तर्क भी मान्य नही है.

वर्तमान मामला जनहित से जुड़ा नहीं

एसजी मेहता ने कहा था कि जनता किसी चीज में दिलचस्पी ले सकती है, लेकिन वर्तमान मामला जनहित के नहीं है. आरटीआई में याचिका दायर करने वाले नीरज की ओर से पेश वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े ने कहा था कि मांगी गई जानकारी सामान्य रूप से किसी भी विश्वविद्यालय द्वारा नोटिस बोर्ड पर प्रकाशित की जाती है. यह तब कि विश्वविद्यालय की वेबसाइट और समाचार पत्रों के माध्यम से भी. यह वह सूचना है जिसके आधार पर लोग निर्णय लेते है. कला में स्नातक की डिग्री के आधार पर ही मैं एलएलबी में प्रवेश ले सकता हूं. पुरानी डिग्री होने के नाते उसकी जानकारी दिए जाने से किसी को दिया जा सकता है. एसजी ने सुनवाई के दौरान कहा था कि इस तरह के आवेदन अनजान लोग दाखिल नहीं कर सकते.

आरटीआई अधिनियम का किया जा रहा दुरुपयोग

एसजी ने कहा था कि आरटीआई कार्यकर्ता अपने आप मे एक पदनाम बन गया है और पेशा है. लोगों के पास अब विजिटिंग कार्ड है . जबकि आरटीआई अधिनियम अच्छे उद्देश्य के लिए बनाया गया था. लेकिन उसमें कुछ खामियां भी है, और इसका दुरुपयोग किया जा रहा है. कई अदालतों ने इसको लेकर सचेत कर दिया है. एसजी मेहता ने गुजरात हाई कोर्ट के उस फैसले का हवाला दिया जिसमें सीआईसी के वर्ष 2016 के आदेश को रद्द कर दिया गया था.

ये भी पढ़ें:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मोदी की शैक्षणिक डिग्री से जुड़े मामले में फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट ने टाल दिया है।

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Pension Mission Shakti Digital