प्रवर्तन निदेशालय (ED) के 70वें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में ईडी निदेशक राहुल नवीन ने एजेंसी की उपलब्धियों, चुनौतियों और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की. इस दौरान केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी, राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे. निदेशक राहुल नवीन ने कहा कि देश में आर्थिक अपराधों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है.
पहले जहां जांच एजेंसियों का फोकस बैंक फ्रॉड, बड़े कॉर्पोरेट घोटालों और रियल एस्टेट धोखाधड़ी पर रहता था, वहीं अब क्रिप्टोकरेंसी फ्रॉड, साइबर अपराध, आतंकियों की फंडिंग, डिजिटल अरेस्ट, ड्रग्स तस्करी और देश विरोधी गतिविधियां बड़ी चुनौती बनकर सामने आई हैं. उन्होंने कहा कि ईडी ने इन बदलती चुनौतियों के हिसाब से अपनी जांच प्रणाली को मजबूत किया है.
चार्जशीट और कनविक्शन रेट के आंकड़े
आयोजित समारोह के दौरान निदेशक राहुल नवीन ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान ईडी ने पीएमएलए (PMLA) के तहत 812 अभियोजन शिकायतें (चार्जशीट) दाखिल की हैं, जिनमें 155 सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी शामिल हैं. यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में लगभग दोगुना है. उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में ईडी ने अपने कुल मामलों का 4 फीसदी हिस्सा दर्ज किया है, जो जांच की बढ़ती रफ्तार को दिखाता है. उन्होंने दावा किया कि ईडी की कनविक्शन रेट 94 प्रतिशत है और ट्रायल कोर्ट में लंबित 2400 से ज्यादा मामलों में ज्यादातर आरोपियों को सजा मिलने की उम्मीद है.
संपत्ति जब्ती और पीड़ितों को राहत
निदेशक नवीन ने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों की जांच बेहद जटिल होती है, क्योंकि इनमें कई देशों तक फैले लेनदेन, फर्जी कंपनियां और नई तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है. उन्होंने बताया कि पिछले वित्त वर्ष में ईडी ने 81,422 करोड़ रुपये की संपत्ति को अटैच किया है, जो पिछले साल के मुकाबले 170 फीसदी ज्यादा है. अब तक कुल 2.36 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की जा चुकी है. निदेशक ने बताया कि 2019 में पीएमएलए कानून में बदलाव के बाद पीड़ितों को राहत देना आसान हुआ है. इसी के तहत अब तक 63,142 करोड़ रुपये बैंकों, निवेशकों और घर खरीदारों को लौटाए जा चुके हैं. उन्होंने पीएसीएल (PACL) और उदयपुर रियल एस्टेट केस का उदाहरण देते हुए कहा कि हजारों लोगों को उनकी संपत्ति वापस दिलाई गई.
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भगोड़े आर्थिक अपराधियों पर नकेल
उन्होंने कहा कि भगोड़ा आर्थिक अपराधी कानून (FEOA) के तहत 31 मार्च 2026 तक 54 लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई, जिनमें से 21 को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया जा चुका है. इस कानून के तहत 2,178 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि भारत अब ‘एशिया-पैसिफिक एसेट रिकवरी नेटवर्क’ की स्टीयरिंग ग्रुप की अध्यक्षता कर रहा है और 2026 में इसकी वार्षिक बैठक की मेजबानी करेगा.
भविष्य का लक्ष्य: सुरक्षित आर्थिक व्यवस्था
निदेशक राहुल नवीन ने अधिकारियों और कर्मचारियों की तारीफ करते हुए कहा कि अपराधी लगातार नए तरीके अपना रहे हैं, लेकिन ईडी नई तकनीक और बेहतर जांच प्रणाली के जरिए खुद को लगातार मजबूत कर रही है. उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक व्यवस्था को सुरक्षित रखना और अपराध की कमाई को समाज तक वापस पहुँचाना ही एजेंसी का सबसे बड़ा उद्देश्य है.
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