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‘सबूतों से छेड़छाड़ न करें और जांच में सहयोग करें’, पवन खेड़ा को जमानत देते सुप्रीम कोर्ट ने लगाईं शर्तें

सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सशर्त अग्रिम जमानत दे दी है. असम सरकार ने जालसाजी और मानहानि के आरोपों के तहत उनकी गिरफ्तारी की मांग की थी.

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सुप्रीम कोर्ट से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा को बड़ी राहत मिल गई है. जस्टिस जेके महेश्वरी और जस्टिस अतुल एस चंदूरकर की पीठ ने पवन खेड़ा को कुछ शर्तों के साथ अग्रिम जमानत दे दी है. कोर्ट ने सभी पक्षों की जिरह के बाद शुक्रवार को अपना फैसला सुनाया. कोर्ट ने पवन खेड़ा को जांच में सहयोग करने का स्पष्ट आदेश दिया है. साथ ही, कोर्ट ने कहा है कि पवन खेड़ा सबूतों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे और न ही गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश करेंगे.

असम सरकार और एसजी तुषार मेहता का विरोध

मामले की सुनवाई के दौरान असम सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत का कड़ा विरोध किया था. खेड़ा ने गुवाहाटी हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी. एसजी मेहता ने तर्क दिया था कि “बंटी-बबली गायब होने वाले हैं” जैसा बयान छवि धूमिल करने वाला है. इसके अलावा, दस्तावेजों को फोर्ज (जालसाजी) करके दिखाया गया है, जो एक आपराधिक कृत्य है. एसजी ने यह भी कहा था कि गैर-जमानती धाराओं के तहत दर्ज मामले में गिरफ्तारी आवश्यक होती है और खेड़ा जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं. उन्होंने खेड़ा के फरार होने और वीडियो जारी कर पुलिस से बचने की बात का भी जिक्र किया था.

अभिषेक मनु सिंघवी की दलीलें

वहीं, खेड़ा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था कि यह एक अभूतपूर्व मामला है, जहाँ गिरफ्तारी की आशंका को अभियोजक ने स्वयं पुष्ट कर दिया है. सिंघवी ने कहा कि अगर डॉ. अंबेडकर ने कल्पना भी की होती कि संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति ‘संवैधानिक काउबॉय’ की तरह बोलेगा, तो वे अपनी कब्र में करवटें बदल लेते. उन्होंने मुख्य आरोप को केवल प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने वाला बताया और आरोप लगाया कि निजामुद्दीन में पुलिस इस तरह पहुँची जैसे किसी आतंकवादी की तलाश की जा रही हो.

गुवाहाटी हाई कोर्ट और पूर्व सुनवाई का संदर्भ

इससे पहले गुवाहाटी हाई कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया था. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि पहली नजर में यह मामला सिर्फ मानहानि का नहीं, बल्कि फर्जी दस्तावेज रखने से जुड़ा गंभीर मामला लगता है. कोर्ट का मानना था कि खेड़ा जांच से बचने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए पुलिस को उनका कस्टोडियल इंट्रोगेशन (हिरासत में पूछताछ) करना जरूरी है. असम सरकार ने पूर्व में तेलंगाना हाई कोर्ट द्वारा दी गई जमानत पर भी सवाल उठाए थे.

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हिमंता बिस्वा सरमा के परिवार पर आरोप

यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा के खिलाफ कथित तौर पर मानहानिकारक और दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाने के लिए दर्ज किया गया था. पवन खेड़ा ने असम पुलिस द्वारा उनके खिलाफ दर्ज मामले में गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा की मांग की थी. असम पुलिस ने पवन खेड़ा के खिलाफ मानहानि, जालसाजी और आपराधिक साजिश के तहत केस दर्ज किया है.



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