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650 करोड़ का मेडिकल इक्विपमेंट घोटाला: डॉ. वत्सला अग्रवाल की बढ़ीं मुश्किलें, मनी ट्रेल खंगालने उतरेगी ED

दिल्ली के 650 करोड़ के मेडिकल इक्विपमेंट और सर्जिकल सामान खरीद घोटाले में पूर्व डायरेक्टर डॉ. वत्सला अग्रवाल पर शिकंजे के बाद अब ED की एंट्री होने जा रही है. ACB की जांच के बीच इस मामले में 100 से अधिक डॉक्टरों और अफसरों से पूछताछ की तैयारी है.

Enforcement Directorate ED

करोड़ो रुपये के सर्जिकल सामान और मेडिकल इक्विपमेंट की कथित खरीद घोटाला मामले में गिरफ्तार पूर्व डायरेक्टर डॉ. वत्सला अग्रवाल की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है. एसीबी (ACB) के बाद अब बहुत जल्द प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की एंट्री होने जा रही है. ईडी का फोकस मनी ट्रेल पर है और यह पता लगाया जा रहा है कि सरकारी भुगतान किन कंपनियों, खातों और अंतिम लाभार्थियों तक पहुंचा.

टेंडर और भुगतान प्रक्रिया की हो रही जांच

वही दूसरी ओर, एसीबी के अधिकारी लगातार पूछताछ कर रहे हैं. इसके अलावा, एसीबी ने अकाउंट्स के डिप्टी कंट्रोलर नीरज चोपड़ा को भी गिरफ्तार किया था; उनको भी राऊज एवेन्यू कोर्ट ने रिमांड पर भेज दिया था. इससे पहले इसी मामले में डॉक्टर विजय कुमार रंगा को गिरफ्तार किया गया था, जिनको कोर्ट ने चार दिन के लिए रिमांड पर भेज दिया था.

जांच एजेंसियां टेंडर मंजूरी, वित्तीय अनुमोदन, भुगतान प्रक्रिया और खरीद संबंधी निर्णयों की परत-दर-परत जांच कर रही हैं. मामले में कई अन्य अधिकारियों को भी जांच में शामिल होने के लिए नोटिस भेजे जाने की संभावना है.

सत्येंद्र जैन के कार्यकाल का है मामला

एसीबी के अनुसार, 100 से अधिक डॉक्टरों और अधिकारियों को जांच के दायरे में लिया जा चुका है, जिनमें सबसे बड़ी संख्या डॉक्टरों की है. कई सरकारी अस्पतालों से रिकॉर्ड जुटाए गए हैं और संबंधित अधिकारियों से पूछताछ की जा रही है. जांच का दायरा अब केंद्रीय खरीद एजेंसी तक सीमित नहीं रह गया है.

आरोप है कि पोर्टेबल एक्स-रे मशीन, बेड शीट और लिनन के सामान, सी-आर्म रेडियोलॉजिस्ट उपकरण, एनेस्थीसिया वर्क स्टेशन, ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन, सर्जिकल सामान, दवाएं और अन्य मेडिकल सामान की खरीद की प्रक्रियाओं में हेरफेर करके इन्हें बढ़ी हुई कीमतों पर खरीदा गया. यह घोटाला पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन के कार्यकाल में हुआ है, जिसकी जांच एसीबी कर रही है.

दिल्ली सरकार ने किए बंपर तबादले

दरअसल, यह पूरा मामला दवाइयों, सर्जिकल सामान और मेडिकल उपकरणों की खरीद में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा हुआ है. यह पूरा मामला करीब 650 करोड़ रुपये की अनियमितता का है. आरोप है कि सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (CPA) के माध्यम से करीब 650 करोड़ की खरीद प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियां की गईं.

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बता दें कि एजेंसी ने इस मामले में 2 जून को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की तमाम धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था. यह मामला सामने आने के बाद दिल्ली सरकार ने स्वास्थ्य विभाग में सचिव स्तर के लगभग सभी अधिकारियों का तबादला कर दिया है. लगभग 50 से अधिक आईएएस (IAS) और डैनिक्स (DANICS) अधिकारियों को अलग-अलग विभागों में नई जिम्मेदारियां दी गई हैं.



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