जबरन धर्म परिवर्तन को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 14 मई को सुनवाई करेगा. यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से दायर की गई है. दायर जनहित याचिका में केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को धोखाधड़ी, धमकी, धोखे से उपहार और पैसे का लालच देकर धर्म परिवर्तन और धर्म परिवर्तन को नियंत्रित करने के लिए कड़े कदम उठाने के लिए निर्देश देने की मांग की गई है.
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जबरन धर्म परिवर्तन, यदि सच है, तो एक गंभीर मुद्दा है जो राष्ट्र सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले पर केंद्र को नोटिस जारी के जवाब मांगा था. बता दें कि राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की सरकार ने 2008 में धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक पारित किया था. लेकिन राज्य विधानसभा में पारित होने के बाद राष्ट्रपति से मंजूरी नही मिली. लव जिहाद और धार्मिक रूपांतरण के कथित मामलों को रोकने के लिए राजस्थान सरकार यह कानून लाने जा रही है.
सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी
राजस्थान के गृह विभाग ने विधेयक को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. गृह विभाग का दावा है कि राज्य में धर्म परिवर्तन के मामले बढ़ रहे हैं. प्रस्तावित नए विधेयक में प्रलोभन, धोखाधड़ी या जबरन धर्मणांतरन को रोकने के लिए सख्त प्रावधान है. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा की गई टिप्पणी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई थी.
जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका से याचिकाकर्ता का नाम हताडिया और याचिकाकर्ता की जगह धर्म परिवर्तन से जुड़े मामले लिखवाया. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने धर्म परिवर्तन को लेकर दायर अलग-अलग सभी याचिकाओं को भी इसी याचिका के साथ क्लब कर दिया था. बाद में जमीयत उलेमा ए हिन्द की ओर से दायर याचिका को भी इसके साथ ही सूचीबद्ध किया गया जिसके जरिये बीजेपी शाषित राज्यों में पारित धर्मणांतरन विरोधी कानूनों को चुनौती दी गई.
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-भारत एक्सप्रेस
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