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20,000 करोड़ का बिटकॉइन घोटाला: डार्विन लैब्स के सह-संस्थापक आयुष वार्ष्णेय को राऊज एवेन्यु कोर्ट से मिली जमानत

20,000 करोड़ रुपये के बहुचर्चित गेन बिटकॉइन घोटाले में डार्विन लैब्स के सह-संस्थापक आयुष वार्ष्णेय को राऊज एवेन्यु कोर्ट से जमानत मिल गई है. सीबीआई द्वारा 10 मार्च को की गई गिरफ्तारी के बाद कोर्ट ने सबूतों की कमी और जांच में सहयोग को आधार बनाते हुए यह राहत दी.

Rouse Avenue Court

Rouse Avenue Court

Edited by Vaibhav Gupta

राऊज एवेन्यु कोर्ट से 20 हजार करोड़ के बहुचर्चित गेन बिटकॉइन क्रिप्टोकरेंसी घोटाले में गिरफ्तार आरोपी और डार्विन लैब्स के सह-संस्थापक आयुष वार्ष्णेय को बड़ी राहत मिल गई है. कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ वैष्णव को जमानत दे दिया है.

हजारों करोड़ की ठगी से जुड़ा मामला

राऊज एवेन्यु कोर्ट ने कहा जमानत देने का उद्देश्य दंडात्मक या निवारण नहीं है, बल्कि मुकदमे की कार्यवाही के दौरान आरोपी की उपस्थिति सुनिश्चित करना है. अदालत ने गिरफ्तारी में देरी, ठोस सबूतों की कमी और प्रवर्तन निदेशालय की जांच में सहयोग को आधार बनाया है. सीबीआई ने डार्विन लैब्स के सह-संस्थापक आयुष वार्ष्णेय को 10 मार्च को गिरफ्तार किया था.

CBI के अनुसार ये मामला हजारों करोड़ रुपए की ठगी से जुड़ा है, जिसमें निवेशकों को क्रिप्टोकरेंसी के जरिए भारी मुनाफे का लालच देकर पैसा निवेश करवाया गया था. बाद में पैसे को हड़प लिया गया. इस मामले में कई तकनीकी प्लेटफॉर्म और डिजिटल टूल्स का.इस्तेमाल कर ठगी का नेटवर्क तैयार किया गया था.

जांच एजेंसी के अनुसार डार्विन लैब्स ने उस डिजिटल ढांचे को तैयार किया था, जिसपर कथित तौर पर चल रहे गेन बिटकॉइन घोटाले की पूरी तकनीकी प्रणाली आधारित थी. जांच में डार्विन लैब्स प्राइवेट लिमिटेड और इसके सह-संस्थापकों आयुष वार्ष्णेय, साहिल बघला और निकुंज जैन की भूमिका सामने आई है. निकुंज जैन वर्तमान में वाओमी एआई के फाउंडर और चीफ कैपिटल अधिकारी भी है.

कब शुरू हुआ मामला?

एजेंसी के अनुसार ये मामला 2015 में शुरू हुई गेन बिटकॉइन स्कीम से जुड़ा है. इस स्कीम की शुरुआत अमित भारद्वाज (अब मृत), उनके भाई अजय भारद्वाज और उनके सबयोगियों ने की थी.

योजना के तहत निवेशकों को हर महीने 10 प्रतिशत तक रिटर्न का लालच दिया जाता था और दावा किया जाता था कि यह मुनाफा बिटकॉइन माइनिंग के जरिए कमाया जा रहा है. जब 2017 में नए निवेशकों का आना कम हुआ, तो कंपनी ने बिटकॉइन में भुगतान बंद कर दिया और निवेशकों को अपना खुद का MCAP टोकन देना शुरू कर दिया, जिसकी बाजार में कोई कीमत नहीं थी. इस धोखाधड़ी के तार दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल तक जुड़े हुए हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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