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Gain Bitcoin Scam: 20 हजार करोड़ के घोटाले का आरोपी आयुष वार्ष्णेय जेल भेजा गया, कोर्ट ने ठुकराई किताब और चश्मे की मांग

20 हजार करोड़ रुपये के बहुचर्चित गेन बिटकॉइन क्रिप्टोकरेंसी घोटाले में गिरफ्तार आरोपी आयुष वार्ष्णेय को राउज एवेन्यू कोर्ट ने 30 मार्च तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.

Rouse Avenue Court

Gain Bitcoin Scam: 20 हजार करोड़ के बहुचर्चित गेन बिटकॉइन क्रिप्टोकरेंसी घोटाले में गिरफ्तार आरोपी को राऊज एवेन्यु कोर्ट ने 30 मार्च तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. सीबीआई ने डार्विन लैब्स के सह-संस्थापक आयुष वार्ष्णेय को रिमांड की अवधि खत्म होने के बाद कोर्ट ने पेश किया गया. कोर्ट ने आरोपी की उस मांग को खारिज कर दिया है, जिसमें न्यायिक हिरासत के दौरान  किताब मुहैया कराने की मांग को खारिज कर दिया है.

आरोपी के वकील ने कोर्ट को बताया कि आरोपी आईआईटी टॉपर रहा है. इसे किताब पढ़ने के लिए दो किताब और चश्मा चाहिए. इसपर कोर्ट ने पूछा कि किताब क्यों चाहिए? किताब की अनुमति नही दी जा सकती है. कोर्ट ने कहा कि न्यायिक हिरासत के दौरान मेडिटेशन या योग बेहतर रहेगा. मुझे लगता है वहां ऐसी व्यवस्था भी रहती है. जो उनके मानसिक और शारीरिक रूप से स्वास्थ रहने के लिए जरूरी है.

सीबीआई के मुताबिक यह मामला हजारों करोड़ रुपए की ठगी से जुड़ा है, जिसमें निवेशकों को क्रिप्टोकरेंसी के जरिए भारी मुनाफे का लालच देकर पैसा निवेश करवाया गया था. बाद में पैसे को हड़प लिया गया. इस मामले में कई तकनीकी प्लेटफॉर्म और डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल कर ठगी का नेटवर्क तैयार किया गया था.

जांच एजेंसी के मुताबिक डार्विन लैब्स ने उस डिजिटल ढांचे को तैयार किया था, जिसपर कथित तौर पर चल रहे गेन बिटकॉइन घोटाले की पूरी तकनीकी प्रणाली आधारित थी. जांच में डार्विन लैब्स प्राइवेट लिमिटेड और इसके सह-संस्थापकों आयुष वार्ष्णेय, साहिल बघला और निकुंज जैन की भूमिका सामने आई है. निकुंज जैन वर्तमान में वाओमी एआई के फाउंडर और चीफ कैपिटल अधिकारी भी है.

बिटकॉइन माइनिंग के नाम पर निवेशकों से करोड़ों की वसूली

जांच एजेंसी के मुताबिक यह मामला 2015 में शुरू हुई गेन बिटकॉइन स्कीम से जुड़ा है. इस स्कीम की शुरुआत अमित भारद्वाज (अब मृत), उनके भाई अजय भारद्वाज और उनके सबयोगियों ने की थी. योजना के तहत निवेशकों को हर महीने 10 प्रतिशत तक रिटर्न का लालच दिया जाता था और दावा किया जाता था कि यह मुनाफा बिटकॉइन माइनिंग के जरिए कमाया जा रहा है. जब 2017 में नए निवेशकों का आना कम हुआ, तो कंपनी ने बिटकॉइन में भुगतान बंद कर दिया और निवेशकों को अपना खुद का MCAP टोकन देना शुरू कर दिया, जिसकी बाजार में कोई कीमत नही थी.

इस धोखाधड़ी के तार दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल तक जुड़े हुए हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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