इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज द्वारा दहेज उत्पीड़न में मामले में दिए गए फैसले न्यायपालिका में चर्चा का विषय बना हुआ है. जस्टिस पंकज भाटिया की अध्यक्षता वाली पीठ ने एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले तीन महीनों में 510 मामलों में से 508 मामलों में शामिल आरोपियों को जमानत दी गई है. जिसपर नाराजगी जाहिर करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया था कि उन्हें जमानत से जुड़े मामलों की सुनवाई का दायित्व न दिया जाए.
सुप्रीम कोर्ट ने देहज के एक मामले में आरोपी को जमानत देने के जस्टिस भाटिया फैसले पर नाराजगी जताई थी और फैसले को निराशाजनक बताया था. इसके अलावा यह भी खुलासा हुआ है कि इन सभा जमानत आदेशों की भाषा, फैसले का स्ट्रक्चर और जमानत राशि भी लगभग एक जैसी ही है. जबकि अलग-अलग मामलों में पीड़ितों की मौत की परिस्थितियां अलग-अलग थी. ज्यादातर मामलों में जमानत के लिए 20-20 हजार रुपये की दो जमानतदारों के साथ व्यक्तिगत बॉन्ड देने का निर्देश दिया गया.
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को किया रद्द
बता दें कि 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. वी विश्वनाथन के पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले को रद्द कर दिया था. जस्टिस पारदीवाला ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि आदेश पढ़ कर समझ ही नही आता कि हाई कोर्ट आखिर क्या कहना चाहता है और इतने गंभीर अपराध में आरोपी को जमानत देने का आधार क्या था. कोर्ट ने दहेज उत्पीड़न के मामले में मिली जमानत को रद्द करते हुए आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था. जिसके बाद जस्टिस पंकज भाटिया ने हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात कर सुप्रीम कोर्ट के टिप्पणियों का जिक्र करते हुए कहा कि भविष्य में जमानत संबंधी मामलों की सुनवाई नही करना चाहते है.
उन्होंने मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया कि उन्हें ऐसे मामले सुनवाई के लिए आवंटित ना किए जाए.
एक रिपोर्ट के मुताबिक 510 में से 508 मामलों में दिए गए फैसलों में से आधे फैसलों में कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है दहेज उत्पीड़न के चलते मौत हुई हो. 510 में से 310 केस में मौत का कारण फांसी, 27 मामलों में जहर खाने, 16 मामलों में गला घोंटने, 11 मामलों में जलने की चोट, 7 में गला दबाकर मारने और 7 सिर में सिर पर चोट लगने का जिक्र है. जबकि चार मामलों में डूबने से मौत की बात कही गई है. जबकि 10 मामलों में कोर्ट ने कहा कि आरोपी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नही है.
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-भारत एक्सप्रेस
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