महाराष्ट्र में 14000 करोड़ रुपये के मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को लेकर एलएंडटी की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता व्यक्त की है. सीजेआई बी. आर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ पर ने मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि यह हजारों करोड़ का सार्वजनिक पैसा है. कृपया निर्देश ले, नही तो हम आदेश पारित करेंगे.
कोर्ट 29 मई को करेगा अगली सुनवाई
कोर्ट 29 मई को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. सुनवाई के दौरान सीजेआई गवई ने यह भी कहा कि पैसे का सवाल तब उठता है जब यह जनहित का मामला हो. बोलिया लगाने वाले का नाम ही काफी है, वही कंपनी है जिसने सेंट्रल विस्टा बनाया. सुप्रीम कोर्ट लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) की ओर से दायर दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है.
कुल 14000 करोड़ रुपये की है परियोजनाएं
याचिका पर MMRDA के दो परियोजनाओं की निविदा प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की गई है. ये परियोजनाएं कुल 14000 करोड़ रुपये की है. याचिका में एलएंडटी ने निविदा प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और प्रक्रियात्मक अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है. इससे पहले जस्टिस जे. बी पारदीवाला की पीठ ने कहा था कि यह मामला तत्काल सुनवाई योग्य और जरूरी मामला है.
बॉम्बे हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह खारिज की थी याचिका
बता दें कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह एलएंडटी की याचिका को खारिज कर दिया था, जिससे MMRDA को निविदाएं खोलने की अनुमति मिल गई थी. जिन परियोजनाओं को लेकर विवाद है उनमें गायमुख से फाउंटेन होटल जंक्शन तक सड़क सुरंग (रोड़ टनल) का डिजाइन और निर्माण, ठाणे-घोडबंदर रोड़ के साथ-साथ एक एलिवेटेड रोड़ का निर्माण शामिल है.
-भारत एक्सप्रेस
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