इंडोगो की उड़ानों को रद्द किए जाने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 15 दिसंबर को सुनवाई कर सकता है. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया था. कोर्ट ने कहा था कि यह सरकार की डियूटी है. सरकार इसको देख रही है. सरकार खुद मामले में संज्ञान ले चुकी है. सुप्रीम कोर्ट के वकील नरेंद्र मिश्रा ने जनहित याचिका दायर कर पूरे संकट पर स्वतः संज्ञान लेने और तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है.
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर प्रभावित यात्रियों के लिए वैकल्पिक यात्रा और मुआवजे की मांग की गई है. दायर याचिका में यात्रियों को भारी परेशानी और मानवीय संकट पैदा होने का दावा किया है और त्वरित हस्तक्षेप की मांग की गई है. उड़ान रद्द होने के कारण पायलटों के नए FDTL नियमों की योजना को गलत बताया गया है. याचिका में यह भी कहा गया कि इस तरह से उड़ानों को रद्द करना अनुच्छेद 21 के अधिकारों का उल्लंघन है.
एयरलाइन और सरकार के बीच फंसे यात्री
याचिका में कहा गया है कि छह बड़े मेट्रो शहरों में एयर लाइंस का ऑन-टाइम परफॉर्मेंस 8.5 प्रतिशत गिर गया है. हजारों यात्री जिनमें बुजुर्ग, बच्चे, दिव्यांग और बीमारी से जूझ रहे लोग शामिल है, एयरपोर्ट पर घंटो फंसे रहे. याचिका में यह भी कहा गया है कि एयरपोर्ट पर खाने-पीने, आराम, कपड़े, दवाइयों और रहने की बुनियादी सुविधाएं तक नही दी गई. जबकि एयरलाइन ने खुद मान लिया है कि उसके पास पर्याप्त व्यवस्था नही है. अनेक मामलों में आपातकालीन मेडिकल जरूरतों की भी अनदेखी कर दी गई है.
हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में संज्ञान लिया है. कोर्ट ने केंद्र सरकार, डीजीसीए और इंडिगो से कहा कि वह इंस्योर करें कि को यात्री अलग-अलग एयरपोर्ट पर फंसे हुए है, उन्हें पर्याप्त मुआवजा देने को कहा है. साथ सरकार से सभी एयरलाइंस में पर्याप्त पायलटों की नियुक्ति करने को भी कहा है. कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में गठित कमेटी की जांच पूरी होने पर अगली सुनवाई से पहले सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट पेश करें.
दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र और अधिकारियों को लगाई फटकार
कोर्ट ने इंडिगो की अव्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों से पूछा ऐसी स्थिति उत्पन्न क्यों हुई? कोर्ट ने पूछा था यात्रियों की सहायता के लिए क्या कदम उठाए गए? कोर्ट ने सरकार से फंसे हुए यात्रियों के प्रबंधन और हवाई अड्डों पर उत्पीड़न को रोकने के लिए किए गए इंतजामों के बारे में स्पष्टीकरण मांगा है. मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा था कि हम आपके प्रयासों की सराहना करते हैं, लेकिन इस स्थिति को उत्पन्न करने में सरकार की क्या भूमिका रही? यह केवल हवाई अड्डे पर फंसे व्यक्तिगत यात्रियों का मामला नही है. यह अर्थव्यवस्था को हुए नुकसान का भी सवाल है. लोगों की सहायता और मुआवजे के लिए आपने क्या कदम उठाए है?
दायर याचिका में मांग की गई है कि रद्द उड़ानों के सभी यात्रियों को तत्काल सहायता दी जाए और सभी टिकटों का पैसा तुरंत रिफंड किया जाए. याचिकाकर्ता के वकील ने कहा था कि कई लोग फंसे हुए हैं. हवाई अड्डों पर जमीनी हालात अमानवीय है. हम उम्मीद कर रहे हैं कि अदालत हवाई अड्डों पर फंसे लोगों के लिए इंडिगो और जमीनी सहायके कर्मचारियों को आदेश देगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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